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थ्री-डी बायोप्रिंटर तैयार करेगा प्राकृतिक जैसी सिंथेटिक स्किन: 3D Bioprinter

11:00 AM Jul 01, 2024 IST | Reena Yadav
थ्री डी बायोप्रिंटर तैयार करेगा प्राकृतिक जैसी सिंथेटिक स्किन  3d bioprinter
3D bioprinter will prepare natural like synthetic skin
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3D Bioprinter: यह थ्री-डी प्रिंटर मानव की प्राकृतिक त्वचा की जैसी त्वचा तैयार करेगा। इस त्वचा को प्रत्यारोपित कर जले हुए हिस्से की त्वचा भी पहले की तरह नजर आने लगेगी।

हम और आप यानी महिलाएं खासतौर पर अपने चेहरे को लेकर काफी सजग होती हैं। चेहरा है तो उस पर होने वाले दाग-धब्बे भी हैं, जो किसी भी महिला को नहीं सुहाते। इसके लिए ज्यादातर महिलाएं घरेलू ही नहीं, बल्कि सर्जिकल उपचार करवाने से भी नहीं हिचकतीं। सर्जिकल उपचार के अनेक दुष्परिणाम होते हैं और कॉस्मेटिक क्लीनिक पर जाकर रेगुलर पील इत्यादि करवाने में काफी पैसा खर्च होता है।

इसके अलावा आजकल देश में बढ़ रहे एसिड अटैक की शिकार महिलाओं को तो अपना चेहरा खो देने जैसी त्रासदी झेलनी पड़ती है। ऐसे में यह कल्पना करना ही कितना सुखद है कि कोई ऐसा तरीका हो जिससे हमारी त्वचा पहले जैसी युवा हो जाए। पिछले दो दशकों से दुनिया भर के साइंटिस्ट दाग-धब्बों के लिए कुछ ऐसे तरीके ईजाद करने में जुटे थे जो कम तकलीफदेह हों और जिनसे जली त्वचा पहले की तरह स्निग्ध और प्राकृतिक नजर आए।
स्पेन में हो रही एक नई रिसर्च हमारी इस कल्पना के काफी करीब है, जिसमें हमारी त्वचा की तरह प्राकृतिक दिखने वाली आर्टिफिशियल त्वचा तैयार कर उसे आपके जले हुए या दाग-धब्बों वाले हिस्से पर प्रत्यारोपित किया जा सकता है। इसके लिए एक थ्री-डी प्रिंटर तैयार किया गया है जो मानव की प्राकृतिक त्वचा की तरह काम करने योग्य त्वचा तैयार करेगा। इस त्वचा को मानव के शरीर पर कहीं भी प्रत्यारोपित किया जा सकेगा। यहां तक कि जले हुए हिस्से की त्वचा भी इसके माध्यम से पहले की तरह नजर आने लगेगी।
साइंटिस्ट इस थ्री-डी प्रिंटर में सिंथेटिक स्किन तैयार करने के लिए बायोलॉजिकल उत्पादों का बायोइंक इंजेक्टर्स से कार्ट्रिज की तरह इस्तेमाल करेंगे। इसके प्रोडक्शन को एक कंप्यूटर कंट्रोल करेगा और सभी कंपोनेन्ट्स को सावधानीपूर्वक प्रिंट बेड पर डिपॉजिट करेगा।

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सबसे पहले प्राकृतिक दिखने वाली त्वचा की ऊपरी सतह एपीडर्मिस तैयार होगी और फिर इसके अंदर की मोटी और अन्दरूनी अन्य सतहें तैयार होंगी।
यह त्वचा दो तरह से बनाई जा सकेगी। फार्मा कंपनियों के इंडस्ट्रियल इस्तेमाल के लिए सेल्स के स्टॉक से केमिकल और कॉस्मेटिक टेस्टिंग के माध्यम से और दूसरे व्यक्तिगत रूप से किसी भी व्यक्ति की त्वचा का नमूना लेकर जली त्वचा या किसी और तरह के दाग-धब्बों पर प्रत्यारोपित करना। रिसर्च कर रहे प्रमुख साइंटिस्ट में से एक और स्पेन की कार्लोस दे मेड्रिड बायोइंजीनियरिंग एंड एरोस्पेस यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जोस लुई जोर्केनो का कहना है कि इससे स्किन ग्राफ्टिंग सर्जरी की जरूरत ही समाप्त हो जाएगी।
इस सर्जरी की समस्या यह थी कि बड़े घावों के लिए आपके पास पर्याप्त त्वचा नहीं होती थी, लेकिन अब थ्री-डी प्रिंटर से बड़े-बड़े घावों की त्वचा को सही करना आसानी से संभव हो गया है। इसके अलावा इसकी एक खासियत यह है कि इसमें त्वचा के बदलने की प्रक्रिया में लगने वाला काफी समय बचेगा। आमतौर पर अभी किसी मानव की त्वचा से जलने के घाव को भरने में घाव की गहराई के अनुसार कुछ दिनों से लेकर कुछ महीने तक लग सकते हैं लेकिन इस प्रिंटर से तैयार त्वचा से इन्हीं घावों को भरने में सिर्फ 5 से 10 दिन तक का समय ही लगेगा।
यह दुनिया में अपनी तरह का पहला बायोप्रिंटर है जो स्पेन में पिछले 25 सालों से प्रयोगशाला में तैयार त्वचा को जले हुए रोगियों की त्वचा पर सफल प्रत्यारोपण का नतीजा है। फिलहाल वेक फॉरेस्ट स्कूल ऑफ मेडिसिन में जली हुई त्वचा पर प्रिंटिंग स्किन सेल्स के स्थायित्व और जीवन क्षमता की जांच चल रही है।
हालांकि स्पेन का थ्री-डी बायोप्रिंटर अभी जनता के उपयोग के लिए उपलब्ध नहीं है लेकिन ऐसा होना ज्यादा दूर भी नहीं है। जोर्केनो का कहना है कि इसके कमर्शियल प्रयोग की कोई तकनीक विकसित करने के लिए साइंटिस्ट कंपनियों से साझेदारी करने की प्रक्रिया में हैं और उम्मीद है कि यह थ्री-डी बायोप्रिंटर दाग-धब्बों और जली त्वचा पर इस्तेमाल के लिए आनेवाले दो सालों के अंदर बाजार में उपलब्ध होगा।
इसके प्रोटोटाइप को तैयार करने की प्रक्रिया में यूरोप की कुछ सरकारी अड़चनों को दूर करने के बाद इसके दूरगामी परिणाम काफी उत्साह बढ़ाने वाले हैं। अगर थ्री-डी प्रिंटिंग तकनीक से त्वचा बन सकती है तो मानव के दूसरे अंगों के टूश्यू क्यों नहीं विकसित किये जा सकते, इस रिसर्च का अगला चरण इसी दिशा में बढ़ने वाला है।

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