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आवाज दे तू कहां है - कहानियां जो राह दिखाएं

09:00 PM Jun 30, 2024 IST | Reena Yadav
आवाज दे तू कहां है   कहानियां जो राह दिखाएं
aavaaj de tu kahaan hai
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Hindi Story: एक दिन वीरू अपने कुछ दोस्तों के साथ बैठ कर दारू पी रहा था कि पास से गुजरते हुए मोहल्ले के एक बुजुर्ग सज्जन ने उससे कहा कि बेटा मैं तुम्हें पहले भी कई बार कह चुका हूं कि दारू पीना बहुत बुरी बात है। तुम मेरी बात मानो या न मानो, लेकिन तुम बिल्कुल गलत रास्ते पर जा रहे हो। अगर तुम इसी राह पर चलते रहे तो बहुत जल्द तुम अपने परिवार के साथ-साथ भगवान से भी दूर हो जाओगे। यदि अब भी तुमने अपनी आदत न बदली तो भगवान से मिलना तो दूर तुम सारी उम्र उसके कभी दर्शन भी नहीं कर पाओगे।

जैसा कि अक्सर होता है कि दारू पीने वाले बिना सिर-पैर की बातों पर बहस करने लगते हैं, इसी तरह वीरू भी उस बुजुर्ग के साथ इस विषय को लेकर उलझ गया कि मैं तुम्हारी यह फालतू की बात को नहीं मानता, क्यूंकि भगवान नाम की कोई चीज इस दुनिया में है ही नहीं। क्या तुम मुझे किसी भी एक ऐसे आदमी से मिलवा सकते हो जिसने अपने जीवन में कभी भगवान को देखा हो। उस बुजुर्ग ने वीरू से कहा कि क्या तुम यह साबित कर सकते हो यदि भगवान नहीं है तो इतनी बड़ी दुनिया खुद-ब-खुद कैसे बन गई। वीरू ने गिलास से दारू का घूंट पीते हुए कहा कि मैं यह तो नहीं जानता कि इस दुनिया को किसने और कैसे बनाया। लेकिन मैं यह सिद्ध कर सकता हूं कि भगवान का नाम एक अंधविश्वास से बढ़ कर कुछ भी नहीं है। वीरू के इस दावे को सुन कर एक बार तो वो बुजुर्ग भी सन्न रह गये। उन्होंने एक लंबी सांस लेने के बाद वीरू से कहा कि तुम्हारे पास ऐसा कौन-सा विज्ञान है जिसके दम पर तुम यह इतना बड़ा दावा कर रहे हो।

वीरू ने कहा-‘जब कुछ दिन पहले भी हमारी इस विषय पर बहस हुई थी तो आपने कहा था कि भगवान तो कण-कण में बसता है। मैंने उसी दिन एक पत्र भगवान के नाम लिख भेजा था। उस पत्र में मैंने भगवान को लिखा था कि ऐ प्यारे भगवान जी, यदि आप इस दुनिया में कहीं भी रहते हो तो एक बार हमारे मोहल्ले में जरूर आओ ताकि हम लोग यह फैसला कर सके कि तुम सच हो या नहीं। जैसा आपने कहा था मैंने यह खत ईश्वर सर्वशक्तिमान सर्वत्र व्याप्त के नाम से डाक में भेज दिया था। वैसे तो अब तक मैं भी इस बात को पूरी तरह से भूल चुका था, लेकिन कल ही अचानक भगवान जी की चिट्ठी डाकखाने वालों ने यह लिख कर वापिस भेज दी की इस पत्र को पाने वाला कोई नहीं मिला। इसलिये भेजने वाले को वापिस किया जाता है। इस पत्र के वापिस आने से पहले तो मेरे मन में भी गलतफहमी थी कि शायद भगवान दुनिया के किसी कोने में रहते होंगे, परन्तु अब तो हमारी सरकार ने भी मेरी बात को मानते हुए इस पर अपनी मोहर लगा कर यह प्रमाणित कर दिया है कि भगवान इस जगत में कहीं नहीं रहता।

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वीरू की सारी दलीलें सुनने के बाद यह बुजुर्ग एक बार तो बुरी तरह से चकरा गए कि इस नास्तिक को कैसे बताया जाये कि ईश्वर का न कोई रंग है न कोई रूप और न ही उसका कोई आकार होता है। परमात्मा को देखा या छुआ नहीं जा सकता, उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। जिसने चांद-सूरज और सारी दुनिया बनाई है जब तक हम उसके करीब नहीं जायेंगे तो हम उसके बारे में कैसे जान सकते हैं। इतना तो हर कोई जानता है कि भगवान किसी भी रूप में कभी भी आपके सामने आ सकता है। इस बात से कोई भी समझदार व्यक्ति इंकार नहीं कर सकता कि जब हमारे साथ कोई नहीं होता उस मुश्किल घड़ी में भगवान ही हमें सहारा देते हैं। जिस किसी ने इस चीज को अनुभव किया है उन लोगों का यकीन देखने लायक होता है।

यह सारे तर्क सुनने के बाद वीरू ने बुजुर्ग महाशय का मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि आपकी इन सारी बातों से भगवान की मौजूदगी तो कहीं नहीं साबित होती। बुजुर्ग महाशय ने सोचा कि इस अक्ल के अंधे से और अधिक बहस क्या की जाये क्योंकि जिस हालत में यह है उसमें तो यह खुद को भी ठीक से नहीं पहचान पा रहा तो ऐसे में यह भगवान को क्या समझेगा। यही बात सोच कर वो वहां से उठ कर उसी इमारत की छत पर चले गये। वीरू को थोड़ी हैरानगी हुई कि यह आदमी इस समय रात के अंधेरे में छत पर क्या करने गया होगा? दारू का गिलास वहीं छोड़ कर वीरू ने इस बुजुर्ग से पूछा कि इतने अंधेरे में यहां क्या कर रहे हो। बुजुर्ग ने जवाब दिया कि मेरा ऊंट गुम गया है उसे ही ढूंढने आया हूं। वीरू ने कहा कि कहीं आपका सिर तो नहीं चकरा गया जो ऊंट को इस छत पर ढूंढ रहे हो। बुजुर्ग ने वीरू से कहा-‘यदि इतनी बात समझते हो तो फिर यह भी जरूर जानते होगे कि एक बीज से अच्छा पेड़ बनने और उस पर फल-फूल पाने के लिये बीज को अपना अस्तित्व खत्म करके मिट्टी से प्रीत करनी पड़ती है। जब तक कोई बीज अपने अंदर का अहंकार खत्म करके पूर्ण रूप से खुद को मिट्टी में नहीं मिलाता उस समय तक वो एक अच्छा पेड़ बनने की कल्पना भी नहीं कर सकता।’

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वीरू के कंधे पर हाथ रख कर बुजुर्ग ने कहा-‘मेरे भाई जब तक हमारी दृष्टि में खोट होता है उस समय तक हमें सारी दुनिया में ही खोट दिखाई देता है। ऐसी सोच रखने वाले इंसान को कोई कैसे समझा सकता है कि भगवान में विश्वास तन से नहीं मन से अधिक होता है। पूजा-पाठ, इबादत का आनंद भी तभी मिलता है जब हमारा मन हमारे साथ होता है।’ जब कुछ देर बाद वीरू का नशा उतरा तो वो इन बुजुर्ग सज्जन के पास माफ़ी मांगने के लिये आया। माफ़ी मांगने के साथ वीरू ने कहा कि एक बात तो समझा दो की कैसे मुझ जैसे अनजान लोग भगवान को पा सकते हैं।

बुजुर्ग सज्जन ने कहा कि उसको पाने का सबसे आसान तरीका है अच्छी संगत करना। इससे यह फायदा होता है कि हमारी सोच भी अच्छी बनने लगती है। इसका छोटा-सा उदाहरण यह है कि पानी की एक बूंद कमल के फूल के ऊपर गिरते ही साधारण पानी की जगह एक मोती की तरह दिखाई देने लगती है। बुजुर्ग सज्जन की बात कहने के तरीके से प्रभावित होकर जौली अंकल यही दुआ करते हैं कि ऐ भगवान, मेरे जैसे लाखों-करोड़ों नासमझ भूले-भटके लोगों को सही राह पर लाने के लिये तू ही आवाज़ देकर बता कि तू कहां है। हर दिन एक नेक काम करने से दूसरों के साथ खुद को भी खुशी मिलती है।

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