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एंटीनेटल टेस्ट-स्वस्थ शिशु और सुरक्षित गर्भावस्था: Antenatal Test

02:30 PM May 10, 2024 IST | Sunaina
एंटीनेटल टेस्ट स्वस्थ शिशु और सुरक्षित गर्भावस्था  antenatal test
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Antenatal Test: जिंदगी का सबसे बड़ा चमत्कार होता है किसी महिला के गर्भ में पल रहा एक नया जीवन। ज्यादातर माताएं इस बात से सहमत होती हैं कि प्रेग्नेंसी ऐसा दौर होता है जब वे रोमांच के साथ-साथ मन ही मन आशंकित भी रहती हैं। गर्भावस्था शुरू होने से लेकर जब तक एक मां अपने स्वस्थ शिशु को अपनी आंखों से ना देख ले तब तक एक भय  की स्थिति बनी रहती है।

हाल के वर्षों में एंटीनेटल टेस्ट (गर्भावस्था में होने वाली जांच) काफी एडवांस हो चुके हैं| इन्हें मोटे तौर पर स्क्रीनिंग व डायग्नोस्टिक टेस्ट में वर्गीकृत किया गया है| स्क्रीनिंग टेस्ट गर्भ में पल रहे भ्रूण में किसी भी तरह की समस्या का पता लगाने में दिशा निर्देश देते हैं और डायग्नोस्टिक टेस्ट उसी समस्या को और गुणवत्ता से पता लगाने में मदद करते हैं।

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Antenatal Test
Pregnancy Itching Remedy

डॉ हेलॉइस स्टेन्ले, लैबोरेट्री हैड, मैट्रोपोलिस हैल्थकेयर लिमिटेड (श्री गंगानगर, राजस्थान) का कहना है कि प्रेगनेंसीकी पुष्टि होने के बाद हर महिला को विस्तृत क्लीनिकल जांच के लिए एक  गाइनेकोलॉजिस्ट से मिलने की सलाह दी जाती है और साथ ही कुछ अनिवार्य जांच जैसे हीमोग्लोबिन, ब्लड शूगर, व टीएसएच लेवल करवाए जाते हैं। जरूरत पड़ने पर कुछ अन्य जांच जैसे ब्लड ग्रुपिंग, वायरल मार्कर, यूरिन जांच, वीडीआरएल, असामान्य हीमोग्लोबिन (थलेसेमिना व सिकेल सेल रोग) करवाने की सलाह दी जाती है।

प्रेग्नेंसी के पहले ट्राइमेस्टर के दौरान यानि, गर्भावस्था के 12वें हफ्ते तक, सभी महिलाओं की डाउन, एडवर्ड और पटौ सिंड्रोम के लिए ब्लड टेस्ट स्क्रीनिंग (डुअल मार्कर) हो जानी चाहिए जो कि रेडियोलॉजी-आधारित टेस्ट (एनटी स्कैन) के साथ की जाती है। यदि यह न हो पाए तो 14वें-22वें हफ्ते में क्वाडरपल मार्कर स्क्रीनिंग करवानी चाहिए। हाल के वर्षों में विज्ञान में प्रगति के चलते एक अत्यंत संवेदनशील टेस्ट, जिसे नॉन-इन्वेसिव प्रीनेटल स्क्रीनिंग टेस्ट (एनआईपीटी) कहा जाता है, और जिसे 11-17वें हफ्ते में करवाया जा सकता है, उपलब्ध हुआ है और इससे उपरोक्त जेनेटिक रोगों का (>95% सेंसटिविटी तथा स्पेस्फिसिटी) पता लगाया जा सकता है।

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कुछ मामलों में, जब गाइनीकोलॉजिस्ट को किसी तरह की असामान्यता का संदेह होता है तो वह जेनेटिक रोग की पुष्टि के लिए क्रोनिक विलस/एम्नियोटिक फ्लूड की 14 से 18वें हफ्ते में, इन्वेसिव टेस्ट जैसे कि क्रियोटाइपिंग, फिश और क्रोमोसोमल माइक्रोएरे, करवा सकते हैं।

antenatal test
Nurse getting blood from on a pregnant woman

इस दौरान, प्रेग्नेंट महिला की हैल्थ का भी ध्यान रखा जाना चाहिए क्योंकि डिलीवरी का परिणाम उसकी सेहत पर ही निर्भर होता है। यदि ब्लड प्रेशर सामान्य से काफी अधिक हो या ग्लूकोज़ लेवल ऊंचा हो तो भ्रूण की सेहत पर इसका असर पड़ सकता है जो कि प्रीटर्म लेबर और अन्य जटिलताओं को जन्म दे सकता है। प्लेसेंटल ग्रोथ फैक्टर एक प्रकार का स्क्रीनिंग टेस्ट है जिसे पहले ट्राइमेस्टर में प्री-एक्लेम्पसिया के लिए किया जाता है। प्रेग्नेंसी के दौरान, ग्लूकोज़ लेवल में गड़बड़ी होने पर ग्लूकोज़ टॉलरेंस टेस्ट (जीटीटी) 24वें से 28वें हफ्ते के दौरान, करवाने की सलाह दी जाती है ताकि गेस्टेशनल डायबिटीज़ मेलाइटस की पुष्टि की जा सके।

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संक्षिप्त में कहां जाए तो यह सब जांच एक मां के उसे 9 महीने के सफर का हिस्सा होती है जिसे पूरा करके वो एक स्वस्थ शिशु की परिकल्पना कर सकती है।

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