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माथे के अलावा गले पर क्यों लगाया जाता है तिलक, जानें इसके अद्भुत फायदे: Hindu Tilaka Belief

06:00 AM Jun 25, 2024 IST | Ayushi Jain
माथे के अलावा गले पर क्यों लगाया जाता है तिलक  जानें इसके अद्भुत फायदे  hindu tilaka belief
Hindu Tilaka Belief
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Hindu Tilaka Belief: हिंदू धर्म प्रतीकों और परंपराओं का एक समृद्ध है, जिनमें से प्रत्येक का अपना गहरा अर्थ और महत्व है। इन प्रतीकों में से एक, जो न केवल धार्मिक समारोहों में बल्कि दैनिक जीवन में भी देखा जाता है, वह है तिलक। माथे पर लगाया जाने वाला यह सरल सा निशान, आस्था और अध्यात्म की ज्योति जगाने से कहीं अधिक है। यह एक ऐसा रिवाज है जो सदियों से चला आ रहा है, जो न केवल सौंदर्य का प्रतीक है, बल्कि आध्यात्मिकता, संस्कृति और वैदिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है। तिलक का स्वरूप विभिन्न संप्रदायों और पूजा-पाठ के अनुसार भले ही बदलता हो, लेकिन इसका सार्वभौमिक महत्व बना रहता है। आइए, इस अध्याय में हम गहराई से जानें कि तिलक हिंदू धर्म में इतना महत्वपूर्ण क्यों है, इसके विभिन्न प्रकार क्या हैं और हमारे दैनिक जीवन में इसके क्या लाभ हैं।

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क्या आप जानते है हिंदू धर्म में तिलक सिर्फ माथे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार गर्दन तक भी होता है। गले पर तिलक लगाने का महत्व धार्मिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण है। ज्योतिष शास्त्र में, गले को 'विशुद्ध चक्र' के रूप में जाना जाता है, जो संचार, आत्म-अभिव्यक्ति और रचनात्मकता का केंद्र है।

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क्या होता है तिलक शब्द अर्थ?

तिलक, माथे पर लगाया जाने वाला एक सरल चिह्न, धार्मिक आस्था और गहरे अर्थ का प्रतीक है। संस्कृत शब्द 'तिला' से व्युत्पन्न, जिसका अर्थ है तिल, तिलक चंदन, हल्दी, सिंदूर या विभूति जैसे पवित्र पदार्थों से बनाया जाता है। यह सदियों से हिंदू संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है, जो शुभता, आशीर्वाद और दैवीय सुरक्षा का प्रतीक है। हिंदू धर्म में, तिलक लगाने का रिवाज अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ और दैनिक जीवन में भी माथे पर तिलक लगाने से भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है और नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा होती है। तिलक लगाने की परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है, और इसका उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है। माथे पर तिलक लगाने के पीछे वैज्ञानिक आधार भी हैं। माथे पर जहां तिलक लगाया जाता है, वहां 'आज्ञा चक्र' स्थित होता है। ज्योतिष शास्त्र में, इस चक्र को एकाग्रता, स्मृति और आत्म-जागरूकता का केंद्र माना जाता है। तिलक लगाने से इस चक्र को उत्तेजना मिलती है, जिससे मानसिक शांति और आत्मबल में वृद्धि होती है।

गर्दन पर तिलक लगाने का महत्व

ज्योतिष शास्त्र में, गले का संबंध विशुद्ध चक्र से है, जिसे कंठ चक्र के नाम से भी जाना जाता है। यह ऊर्जा केंद्र संचार, अभिव्यक्ति और आत्म-अभिव्यक्ति को नियंत्रित करता है। माना जाता है कि गले पर तिलक लगाने से यह चक्र सक्रिय और संतुलित होता है, जिसके फलस्वरूप कई लाभ मिलते हैं।

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विशुद्ध चक्र के सक्रिय होने से व्यक्ति स्पष्ट और प्रभावी ढंग से संवाद करने में सक्षम होता है। विचारों को व्यक्त करने में आसानी होती है, गलतफहमी कम होती है और रिश्ते मजबूत होते हैं।

यह चक्र रचनात्मक ऊर्जा का केंद्र है। गले पर तिलक लगाने से कल्पनाशीलता और अभिव्यक्ति की शक्ति बढ़ती है, जिससे व्यक्ति नए विचारों को जन्म दे पाता है और अपनी प्रतिभा को बेहतर ढंग से व्यक्त कर पाता है।

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स्पष्ट संचार और रचनात्मक अभिव्यक्ति से आत्मविश्वास बढ़ता है। व्यक्ति अपनी क्षमताओं पर विश्वास करने लगता है और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित होता है।

ज्योतिष में, गले को एक संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है जहां नकारात्मक ऊर्जाएं प्रवेश कर सकती हैं। गले पर तिलक लगाने से व्यक्ति नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षित रहता है और सकारात्मकता और सद्भाव को बढ़ावा देता है।

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