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बेटी के नाम एक पिता का पत्र-गृहलक्ष्मी की कविता

04:47 PM Jun 15, 2024 IST | Sapna Jha
बेटी के नाम एक पिता का पत्र गृहलक्ष्मी की कविता
Beti ke Naam Ek Pita ka Patra
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Poem for Father: भेज रहा हूंँ बेटी तुझको ,
करने पूरे अरमान तेरे।
जो पढ़ लिख जाएगी तू,
पूरे होंगे सभी सपने तेरे।
तेरे संँग संँग अपनी पगड़ी की,
लाज भी संँग में भेज रहा।
संगत अपनी अच्छी ही रखना,
न जाने मन क्यों डर रहा।
जब तू लक्ष्य साधेगी अपना,
सीना गर्व से चौड़ा होगा मेरा।
जब तू खड़ी होगी पैरो पर अपने।
छलकेगा का खुशियों का झरना इन आंँखों से मेरा।
बेटा बेटी एक बराबर ,
मैंने सदा ये माना है।
पढ़ लिख कर तुझको भी लाडो,
अब ये साबित कर जाना है।
कोई प्रेम या कोई आकर्षण,
भ्रमित तुझे न कर पाए।
कोई भी झूठा दुनिया का आडंबर,
लक्ष्य से तेरे तुझे न डिगा पाए।
यह दुनिया है एक तिलिस्म,
इससे तू बचकर रहना।
तू मेरी बगिया की कली है,
तू ही मेरे ह्रदय का गहना।
भले बुरे का भेद रखना,
छठी इंद्रिय खोले रखना।
मात-पिता है हमेशा साथ में तेरे,
ये बात हमेशा मन में रखना।

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