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जानिए भगवान गणेश को क्यों चढ़ाते हैं मोदक, क्या है महत्व

एक पौराणिक कथा के अनुसार, गणेश जी और परशुराम जी के बीच एक युद्ध हुआ था। इस युद्ध में गणेश जी का दांत टूट गया था,जिसके कारण उन्हें कोई भी चीज़ खाने में काफी तकलीफ हो रही थी। ऐसी स्थिति में उनके लिए मोदक बनाए गए थे। क्योंकि मोदक काफी मुलायम और मुंह में जाते ही घुल जाने वाले होते हैं। साथ ही, ये मीठा होने के कारण मूंह में किसी तरह की पीड़ा भी नहीं होती। तभी से लेकर गणेश जी मोदक का भोग सबसे अधिक प्रिय है।
05:40 PM Jun 21, 2021 IST |
जानिए भगवान गणेश को क्यों चढ़ाते हैं मोदक  क्या है महत्व
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शास्त्रों के मतानुसार भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए सबसे सरल व उत्तम उपाय है मोदक का भोग। गणेश जी को सबसे प्रिय मोदक है। गणेश जी का मोदक प्रिय होना भी उनकी बुद्धिमानी का परिचय है। मोदक का अर्थ. मोद यानी आनंद व क का अर्थ है छोटा.सा भाग। अतः मोदक यानी आनंद का छोटा.सा भाग। मोदक का आकार नारियल समान यानी ब्रह्मरंध्र के खोल जैसा होता है। हाथ में रखे मोदक का अर्थ है कि उस हाथ में आनंद प्रदान करने की शक्ति है। यही नहीं मोदक ज्ञान का प्रतीक  भी है। जैसे मोदक को थोड़ा.थोड़ा और धीरे.धीरे खाने पर उसके स्वाद और मिठास का पता चलता है और अंत में उसे खाने के बाद हमे आनंद प्राप्त होता है। उसी तरह ज्ञानमोदक को लेकर आरंभ में लगता है कि ज्ञान थो ड़ा सा ही है परंतु अभ्यास आरंभ करने पर समझ आता है कि ज्ञान अथाह है।

भगवान गणेश का पसंदीदा है मोदक

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एक पौराणिक कथा के अनुसार, गणेश जी और परशुराम जी के बीच एक युद्ध हुआ था। इस युद्ध में गणेश जी का दांत टूट गया था,जिसके कारण उन्हें कोई भी चीज़ खाने में काफी तकलीफ हो रही थी। ऐसी स्थिति में उनके लिए मोदक बनाए गए थे। क्योंकि मोदक काफी मुलायम और मुंह में जाते ही घुल जाने वाले होते हैं। साथ ही, ये मीठा होने के कारण मूंह में किसी तरह की पीड़ा भी नहीं होती। तभी से लेकर गणेश जी मोदक का भोग सबसे अधिक प्रिय है और यही कारण है कि भक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए उनकी सबसे पसंदीदा चीज़ का भोग लगाते हैं।

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अन्य पौराणिक कथा

कुछ अन्य पौराणिक कथा के हिसाब से भगवान गणेश को मोदक और लड्डू को भोग विशेष प्रिय माना गया है। एक बार माता पार्वती ने गणेशजी को खाने के लिए लड्डू दिए। लड्डू भगवान को इतने पसंद आए कि ये उनका प्रिय भोग बन गया। एक अन्य कथा के अनुसार माता अनसूया ने गणेशजी को अपने यहां भोजन के लिए आमंत्रित किया था। उस समय वे खाना खाते ही जा रहे थे लेकिन उनका पेट नहीं भर रहा था। इससे परेशान होकर माता अनसूया ने मोदक बनाए। मोदक ग्रहण करते ही गणेशजी तृप्त हो गए। तभी से उन्हें मोदक का भोग लगाने की परंपरा प्रचलित हुई है।

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मोदक का मतलब खुशी

भगवान गणेश को मोदक इसलिए भी पसंद हो सकता है क्योंकि यह मन को खुश करता है। शास्त्रों के अनुसार गणपति जी सदा खुश रहने वाले देवता माने गए हैं और अगर आप मोदक शब्द पर गौर करें तो इसका मतलब होता है खुशी।

भीतर से नरम

मोदक बाहर से कड़ा मगर अंदर से नरम और मिठास होता है। उसी प्रकार से घर का सबसे बड़ा व्यक्ति यानि मुखिया ऊपर से सख्त और अंदर से नरम हो कर घर में नियमों का पालन करवाए तो उस घर में हमेशा सुख.शांति बनी रहती है।

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