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छोटी-छोटी बातें - कहानियां जो राह दिखाएं

09:00 PM Jul 07, 2024 IST | Reena Yadav
छोटी छोटी बातें   कहानियां जो राह दिखाएं
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Hindi Story: पंडित जी ने अपनी तोंद पर हाथ फेरने के साथ बड़ा-सा डकार लेते हुए दूध का गिलास मेज पर रखते हुए मिश्रा जी से कहा कि आज बहुत दिनों बाद इतना बढ़िया और खालिस मलाई वाला दूध पीने को मिला है। जजमान सच्चे दिल से कह रहा हूं कि मन तृप्त हो गया। पास ही खेलते मुन्ने ने मजाक में कह दिया कि पंडित जी यदि आज बिल्ली दूध में मुंह न मारती तो आपको और भी अधिक मजा आना था। यह सुनते ही वहां बैठे सभी लोगों की हंसी छूट गई और पंडित जी का गुस्सा सातवें आसमान पर जा पहुंचा। कुछ पल पहले जो पंडित जी हंस-हंस कर मिश्रा जी को आशीर्वाद देते हुए बतिया रहे थे, अगले पल ही वो मिश्रा जी को बुरा-भला कहने लगे। मिश्रा जी की सभी दलीलों को अनसुना करते हुए पंडित जी आगबबूला होते हुए गुस्से में बुदबुदाते हुए वहां से निकल गये।

इस तरह की छोटी-छोटी बातें हम सभी के जीवन में आए दिन घटती रहती है। हमारे बुजुर्ग एक जमाने से यूं ही तो नहीं कहते आ रहे कि तलवार का घाव तो समय पाकर भर जाता है, परन्तु जुबान से निकली हुई तीरों से भी अधिक तेज धार वाली छोटी-छोटी बातों के घाव सारी उम्र नहीं भर पाते। इतना सब कुछ जानते और समझते हुए भी हम जाने-अनजाने कुछ ऐसी बातें अपनी जुबान से कह देते हैं कि फिर लाख प्रयासों के बाद भी अपने सगे रिश्तेदारों से जीवन भर के लिये रिश्ता तोड़ बैठते हैं।

हो सकता है कि आपको यह छोटी-छोटी बातें बड़ी ही बेमानी सी लग रही हो। अजी जनाब, यदि आपको इस बात पर यकीन नहीं आ रहा तो मैं आपको मिश्रा जी के घर की ही एक सच्ची घटना बताता हूं। पिछले साल जब इनके बेटे की शादी हुई और दुल्हन बेगम घर पर पधारी तो चारों ओर हंसी और कहकहे गूंज रहे थे। जैसे ही बहू के स्वागत की रस्में पूरी हुई तो मिश्रा जी ने वहां बैठी सभी लड़कियों और औरतों से कहा कि अब आप लोग दूसरे कमरे में बैठ जाओ ताकि बहू बेचारी थोड़ा आराम कर सके।

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एक-दो बार तो मिश्रा जी की बात को बहू ने चुपचाप सहन कर लिया, परन्तु जैसे ही मिश्रा जी ने तीसरी बार बहू को बेचारी कह के संबोधित किया तो अमीर घराने की अंग्रेजी स्कूल में पढ़ी-लिखी और विदेशी कम्पनी में एक ऊंचे पद पर कार्यरत नई-नवेली दुल्हन ने सभी मर्यादाओं को तोड़ते हुए बेचारी शब्द पर घोर आपत्ति जता दी। वहां बैठे सभी रिश्तेदारों के सामने उसने अपने सीधे-सादे ससुर को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मैं आपको किस ओर से बेचारी लग रही हूं। क्या मैं आपको पढ़ाई-लिखाई या पहनावे से किसी गरीब और लाचार परिवार की लड़की दिखाई दे रही हूं। क्या मेरे दहेज में कोई कमी दिखाई दे रही है? यदि नहीं तो आप बार-बार सभी रिश्तेदारों के सामने मुझे नीचा दिखाने के लिये यह बेचारी-बेचारी का राग क्यूं अलाप रहे हो?

बहू की जुबान से निकला हुआ एक-एक शब्द मिश्रा जी के मन को किसी तीखे कांटे की तरह चुभ रहा था। उन्हें जीवन में पहली बार अधिक पढ़ी-लिखी बहू को अपनाने के अपने जल्दबाजी के निर्णय पर दुःख महसूस हो रहा था। आज तक मिश्रा जी यही समझते थे कि पढ़-लिख लेने से ही इंसान विद्वान हो जाता है। आज उन्हें पहली बार ऐसा प्रतीत हुआ कि शिक्षा में जब तक नैतिक शिक्षा का समावेश नहीं होता, तब तक शिक्षा का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाता।

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मिश्रा जी की पत्नी ने पिछले कई दशकों से अपने पति को इससे पहले कभी इतना दुःखी नहीं देखा था। उसने अपने आंसुओं पर काबू रखते हुए पति को ढाढ़स बंधाते हुए कहा कि आप तो हम सभी को सदैव यही ज्ञान देते रहे हो कि वृक्ष पर जब बहुत सारे फल लगते हैं तो वो झुक जाता है, ठीक इसी प्रकार जैसे-जैसे हमारे अंदर गुणों का विकास होता है, हमें खुद-ब-खुद झुकना सीख लेना चाहिए। गुणवान व्यक्ति कभी अभिमानी नहीं होता, फल वाली डाली सदैव झुकी रहती है। आप तो आज तक अपने बच्चों को भी सदा यही शिक्षा देते रहे हो कि मान-अपमान मिलने पर इंसान को बहुत ज्यादा खुश या दुःखी नहीं होना चाहिए, क्योंकि ये सब भाग्य की देन है। इसी के साथ आपका ही यह कहना है कि नम्र होकर चलना, मधुर बोलना और बांटकर खाना, यह तीन गुण आदमी को ईश्वरीय पद पर पहुंचा देते हैं। मैं तो हैरान हूं कि आप जैसा सूझबूझ वाला आदमी यह जानते हुए भी कि किसी भी आदमी की महानता उसके गुणों के साथ उसके व्यवहार से ही पहचानी जाती है, बहू की इतनी छोटी-सी बात को लेकर परेशान हो रहा है।

इतिहास साक्षी है कि हमारी वाणी ही हमारे दोस्त या दुश्मन बनाती है। जब कि कई बार बैठकों में मौन रहने से मान बढ़ता है और बड़े-बड़े तर्क देने वाले विद्वान होने के बावजूद भी किनारे कर दिए जाते हैं। इसलिये जीवन में यदि सुख पाना है तो सदैव प्रेमयुक्त, मधुर व सत्य वचन बोलें, क्योंकि मीठा बोलने में एक कौड़ी भी खर्च नहीं होती। अंत में जौली अंकल छोटी-छोटी बातों के बारे में बात करते हुए एक छोटी-सी बात कहते हैं कि अगर आप सदा मीठा बोलोगे तो आपको हर ओर से सम्मान ही सम्मान मिलेगा, यदि कड़वे बोल बोलोगे तो फिर आपकी झोली में अपमान को आने से कोई नहीं रोक पायेगा। मज़ाक को कभी भी हल्के में मत लो क्योंकि यह बहुत गंभीर चीज होती है।

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