For the best experience, open
https://m.grehlakshmi.com
on your mobile browser.

डिटॉक्स डाइटिंग नहीं करें डिजिटल डाइटिंग: Digital Dieting

07:00 AM Jun 10, 2024 IST | Pinki
डिटॉक्स डाइटिंग नहीं करें डिजिटल डाइटिंग  digital dieting
Digital Dieting
Advertisement

Digital Dieting: डिजिटल डायटिंग शब्द से ही पता चलता है कि ये आपके डिजिटल उपकरणों के कंज्प्शन को तय करने की योजना है। डायटिंग में आमतौर पर एक सेहतमंद शरीर के लिए कुछ कार्बोहाइड्रेट को कम करने की कोशिश करते हैं और अपने भोजन में लो कैलोरी फूड को शामिल करते हैं। जबकि एक डिजिटल डाइट में आपको मस्तिष्क और शरीर को स्वस्थ बनाने के लिए सोशल मीडिया से परहेज करना होता है ताकि स्क्रीन टाइम को कुछ कम किया जा सके।

एक उदाहरण से समझिए- मनीष की शादी की सालगिरह थी, यही सोचकर उसने अपने करीबी दोस्तों को पार्टी देने की योजना बनाई। इसके लिए सभी दोस्तों को निमंत्रण भी दे दिया। लेकिन एक दोस्त से कनेक्शन नहीं हो पा रहा था ना फेसबुक पर, ना वॉट्सएप पर, ना ट्विटर पर, वह कहीं भी नहीं दिख रहा था फिर आखिर मनीष ने उसके घर जाने का फैसला किया ताकि उसे भी पार्टी में बुलाया जा सके। मनीष ने उस दोस्त के घर पहुंचकर उससे पूछा तो जवाब मिला डिजिटल डायटिंग पर था। डिजिटल डायटिंग? मनीष ने पूछा, मतलब यह कि आईपैड, आईफोन, लैपटॉप, पीसी पर फेसबुक, ट्विटर, वॉट्स ऐप और इंस्टाग्राम जैसी सोशल साइटों से दूरी बना लेना। बिना किसी फोटो या स्टेट्स को अपलोड किए या दूसरे के फोटो या कॉमेंट्स को लाइक-अनलाइक किए असली दोस्तों के संपर्क में रहने की कोशिश करना। हालांकि इंटरनेट हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है और मोबाइल फोन के जरिए डिजिटली कनेक्ट रहने की संख्या या नंबर तेजी से बढ़ रही है। कंप्यूटर या लैपटॉप की स्क्रीन के मुकाबले मोबाइल एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जिससे मोबाइल यूजर खुद को आसानी से जोड़ लेता है। बावजूद इसके आपको इससे थोड़ी दूरी जरूर बनाकर रखनी चाहिए। आइए जानते हैं कि सोशल मीडिया की लत पडऩे के क्या लक्षण होते हैं।

Also read: Digital Detox: मोबाइल से दूरी है कुछ समय के लिए जरुरी

Advertisement

  • 1. जब आप बिना सोचे-समझे हर फोटो, स्टेट्स को लाइक करने लगें।
  • 2. आप कहां हैं, क्या कर रहे हैं, सोशल साइट्स पर हर मिनट इसका अपडेट करने लगें।
  • 3. हर पल के फोटो अपलोड करने की आदत।
  • 4. परिवार, दोस्त और ऑफिस में भी काम के बीच-बीच में, काम तक को अनदेखा करने लगें।
  • 5. इंटरनेट से जुड़े रहने पर बेहद खुशी और दूर रहने पर बेचैनी।
  • 6. इंटरनेट यूज करने का टाइम धीरे-धीरे बढ़ रहा हो।

कैसे करें डिजिटल डायटिंग

  • 1. एक हफ्ते तक बिना पोस्ट, बिना लाइक या बिना कॉमेंट किए रहें।
  • ब्लॉग और दूसरों के कॉमेंट पढ़ सकते हैं लेकिन खुद कॉमेंट नहीं करना है।
  • 3. एक हफ्ते के बाद कुछ समय के लिए मॉडरेट पोस्टिंग से शुरुआत हो सकती है। मतलब कुछ भी पोस्ट करने से पहले कुछ देर सोचें कि क्या वाकई पोस्ट करने की आवश्यकता है! क्या आप ये पोस्ट करना चाहते हैं।
  • 4. फोन से पोस्ट करने से बचें यदि वाकई पोस्ट करने की आवश्यकता है तो पर्सनल कंप्यूटर से पोस्ट करें, इससे अपने आप पोस्टिंग की स्पीड कम हो जाएगी।
  • 5. एक हफ्ते की डाइटिंग के बाद खुद पर इस कंट्रोल को बरकरार रखने के लिए हफ्ते में एक दिन को डिजिटल फ्री डे के तौर पर मनाएं। इस दिन अपने फोन और इंटरनेट का कम से कम यूज करें, इसके लिए छुट्टी का दिन चुनें ताकि आप कम से कम इस दिन परिवार के साथ क्वॉलिटी टाइम गुजार सकें।
    जिस प्रकार से शरीर को सेहतमंद रखने के लिए डिटॉक्स ड्रिंक की आवश्यकता होती है। ठीक उसी प्रकार से माइंड को बूस्ट करने और रिलैक्स रखने के लिए डिजिटल डिटॉक्स जरूरी है। दिनभर मोबाइल, लैपटॉप और टैप से घिरे रहने के चलते हमारा दिमाग हर वक्त किसी न किसी प्रकार से व्यस्त रहता है। इसके चलते चीजों को भूलना, एकाग्रता की कमी और डिप्रेशन का खतरा बना रहता है। साथ ही बच्चों में एकाग्रता की कमी, व्यवहार में बदलाव का लगातार बढऩा दोस्तों से मेलजोल कम हो जाना, प्रकृति से दूरी बना लेना, आंखों से जुड़ी समस्याओं का जोखिम आदि रहता है वे लोग जो डिजिटल डिटॉक्स की ओर बढ़ते हैं और गेजेट्स से दूरी बना लेते हैं। उन्हें मूड स्विंग, नींद न आने और एंजायटी की समस्या से मुक्ति मिल जाती है वे दिनभर ज्यादा खुश और सक्रिय बने रहते हैं।

डिजिटल डिटॉक्स कैसे करें

  • मोबाइल को सीमित दूरी पर रखें: कुछ भी काम करने के दौरान आपका हाथ बार-बार मोबाइल की स्क्रीन को चेक करने के लिए आगे बढऩे लगता है। ऐसे में फिजिकल बाउंड्रीज सेट करना सबसे ज्यादा जरूरी है। इसके लिए वर्कप्लेस से मोबाइल को सीमित दूरी पर रखें। कोशिश करें कि आवश्यकता होने पर ही उसका प्रयोग करें। इससे न केवल आप तनावमुक्त रहेंगे बल्कि काम पर ध्यान बना रहेगा और आपकी उत्पादकता बढ़ जाएगी यानी आप पहले से ज्यादा काम में मन लगाने लगेंगे।
  • स्क्रीन टाइम को सीमित करें: दिनभर में कुछ घंटे के लिए खुद को स्क्रीन से दूर रखने का प्रयास करें। जैसे- डाइनिंग टेबल पर, परिवार के साथ समय बिताते वक्त, कुछ काम करने के दौरान या दोस्तों से बातचीत करते समय। डिजिटल लत के चलते हम हर समय नोटिफिकेशंस को चेक करते रहते हैं। इससे समय तो बर्बाद होता ही है साथ ही दिमाग भी हमेशा व्यस्त रहता है और काम भी अधूरे छूट जाते है।
  • रात को सोने से पहले फोन से दूर रहें: रात को सोने से एक घंटा पहले फोन का प्रयोग न करें और डिजिटल दुनिया जैसे- मोबाइल, टीवी और इंटरनेट, सोशल मीडिया जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक, व्हाट्स-अप, ट्विटर से दूरी बना लें और अपनी पसंद की कोई किताब, पत्रिका पढऩे की आदत डालें और अपने परिवार के साथ बैठकर गपशप करें। देर रात तक फोन का उपयोग करने से इससे नींद पूरी तरह से उड़ जाती है। साथ ही नींद भी पूरी नहीं हो पाती है, इसके अलावा सुबह उठते ही आपको सिरदर्द होने की समस्या भी सताने लगती है और आप दिनभर थकान का अनुभव करते हैं।

डिजिटल डाइटिंग के लाभ

  • 1. आपके मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करता है।
  • 2. डिजिटल आई स्ट्रेन के लक्षणों जैसे- आंखों की थकान, सूखी आंखें, धुंधली, सिरदर्द, लाइट के प्रति संवेदनशीलता में वृद्धि को कम करता है।
  • 3. लंबे समय तक गर्दन झुका कर रखने से गर्दन, पीठ या कंधे में दर्द से राहत देता है।
  • 4. समय की बचत होती है क्योंकि सोशल मीडिया पर दिनभर आते कमैंट्स, पोस्टर, अलर्ट, नोटिफिकेशन, न्यूज हमारा बहुत सारा समय ले लेते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक फ्री वीकेंड

  • 1. हर वक्त आंखों के सामने रहने वाले फोन और लैपटॉप से दूरी बनाए रखने के लिए इलेक्ट्रॉनिक फ्री वीकेंड के आइडिया को अपनाएं। ऐसे में सप्ताह में दो दिन गैजेट्स को खुद से दूर रखें। इससे आप न केवल समय पर अपना काम पूरा कर पाएंगे। एक्सपर्ट के मुताबिक मोबाइल से निकलने वाली ब्लू लाइट आंखों को नुकसान पहुंचाती है तो स्क्रीन के कम इस्तेमाल से आंखों से जुड़ी समस्याओं से भी राहत मिल सकती है।
  • 2. उन ऐप्स को अनइंस्टॉल कर दे जो अनुपयोगी हो।
  • सुबह उठते ही फोन को ना उठाएं। डिजिटल डाइटिंग से आप समय बचाना सीखते हैं और डिजिटल उपकरणों का जरूरत पडऩे पर ही इस्तेमाल करते हैं, जो आपको रचनात्मक बनता है।
Advertisement
Tags :
Advertisement