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दुनियादारी - कहानियां जो राह दिखाएं

09:00 PM Jun 18, 2024 IST | Reena Yadav
दुनियादारी   कहानियां जो राह दिखाएं
duniyaadaaree
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Hindi Story: सेठ गेंदामल जी को जब दिल का ऑपरेशन करने के लिये ऑपरेशन थियेटर में लेकर पहुंचे तो वहां मेज पर कुछ फूलों के हार पड़े हुए थे। सेठजी ने डॉक्टर से पूछा कि आपने यह हार किसलिये मंगवाये हैं। डॉक्टर ने कहा कि आप तो जानते ही हो कि दुनियादारी की कुछ रस्में होती है, बस उन्हीं को निभाने के लिये यह सब कुछ करना पड़ता है।

सेठ गेंदामल ने कहा कि डॉक्टर साहब मैं कुछ समझा कि आप कहना क्या चाहते हो? डॉक्टर साहब ने कहा- ‘भई आज मैं पहली बार किसी के दिल का ऑपरेशन कर रहा हूं, अगर मेरा ऑपरेशन कामयाब हो जाता है तो यह हार अस्पताल वाले मुझे पहनायेंगे और यदि गलती से कहीं कुछ गड़बड़ हो जाती है तो यह हार तुम्हारे काम आ जायेंगे।’ सेठजी ने घबराते हुए कहा कि आप ऐसी बातें मत करो, वरना मेरी तो ऑपरेशन करवाने से पहले ही जान निकल जायेगी। इसी तरह बातचीत करते-करते डॉक्टर साहब ने सेठजी को ऑपरेशन शुरू करने से पहले बेहोशी की दवाई दे दी। जैसे ही इस दवाई का असर सेठ गेंदामल जी के दिमाग पर होने लगा तो उन्हें ऐसा महसूस होने लगा कि वो नींद के आगोश में नहीं बल्कि मौत के आगोश में सोने के लिये जा रहे हो। गहरी बेहोशी की हालात में जाने से पहले सेठजी को अस्पताल में आते समय अपनी गाड़ी के आगे चल रहे एक ऑटो पर लिखा हुआ एक शेर याद गया, जो कुछ इस प्रकार से था कि ’यदि भगवान ने चाहा तो मंजिल तक पहुंचा दूंगा और अगर आंख लग गई तो भगवान से मिलवा दूंगा।’

इस तरह के नकारात्मक विचारों से सेठजी को पक्का विश्वास हो गया कि अब वो बहुत जल्दी भगवान को प्यारे होने वाले हैं। उनके दिमाग पर इस सारे माहौल का इतना गहरा असर हुआ कि बेहोशी की हालात में उन्हें ऑपरेशन कर रहा डॉक्टर यमदूत दिखाई देने लगा। सेठजी ने बेहोशी में ही यह ख्वाब देखा कि उनका ऑपरेशन पूरा हो गया है और उन्हें होश आ गया है। सेठजी डॉक्टर से पूछ रहे हैं कि क्या मेरा ऑपरेशन कामयाब हो गया। दूसरी ओर से जवाब आया- ‘डॉक्टर, अस्पताल, ऑपरेशन आदि सब कुछ खत्म हो चुका है। मैं यमदूत हूं और तुम्हें यहां से देवलोक के राजदरबार में ले जाने के लिये आया हूं। सेठजी पहले तो यमदूत को देखकर घबरा गये फिर अगले ही पल हिम्मत करके मन ही मन बोले कि सारी उम्र नगर-निगम से लेकर इनकमटैक्स के अफसरों को अच्छे से झेला है तो यह यमदूत किस खेत की मूली है। अभी थोड़ी ही देर में इसका भी कोई जुगाड़ करता हूं।

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सेठजी ने यमदूत से कहा-‘महाराज आप जैसा चाहो वैसा ही करो, लेकिन हमारे यहां पृथ्वीलोक के भी कुछ रस्मों-रिवाज़ है।’ यमदूत ने कड़कती आवाज में कहा कि हम यमलोक निवासी किसी दूसरे लोक के कायदे-कानून को नहीं मानते। हमें तो जिस किसी को इस लोक से ले जाने का हुक्म मिलता है उसे तुरंत पूरा कर देते हैं। सेठजी ने कहा कि मैं आपको ड्यूटी करने से नहीं रोक रहा। मेरी तो बस इतनी-सी प्रार्थना है कि हमारे यहां कोई भी आये हम लोग उसे बिना जलपान के नहीं जाने देते। आप तो इतनी दूर, वो भी दूसरे लोक से आये हो हमें कुछ आवभगत और सत्कार करने का अवसर तो आपको देना ही होगा। आखिर मेहमाननवाजी और दुनियादारी भी कोई चीज होती है।

आदर-सत्कार की बात सुनते ही यमदूत ने कहा-‘चलो ठीक है, मैं यहां कुछ देर आराम करता हूं तुम्हें जो भी दुनियादारी की रस्में निभानी हो उन्हें जल्दी से पूरा कर लो।’ सेठजी ने जैसे ही यह देखा कि यमदूत कुछ नरम पड़ रहे हैं तो उनका दिल बल्लियां उछलने लगा कि उनका पहला ही तीर बिल्कुल ठीक निशाने पर लगा है। अब उनको यह विश्वास होने लगा कि यमदूत को किसी न किसी तरह से चकमा दे कर मैं खुद को इनके चंगुल से बचा ही लूंगा। यमदूत को अधिक समय उलझाने के चक्कर में सेठजी ने अपने घरवालों को यमदूत के लिये अच्छे से नाश्ते का इंतजाम करने के लिये हुक्म सुना दिया। इसी दौरान यमदूत ने जानबूझ कर अनजान बनते हुए सेठ से पूछा कि आखिर तुम्हारी यह दुनियादारी होती क्या चीज है? हमारे यहां तो इस तरह की कभी कोई प्रथा देखने में नहीं आई। सेठजी ने यमदूत से तो कुछ नहीं कहा, लेकिन अपने ही दिल में सोचने लगे कि तुम आज तक इस दुनिया में कभी रहे ही नहीं तो तुम क्या जानो कि दुनियादारी क्या होती है? हमारी यह दुनिया ही हर किसी को दुनियादारी के बारे में सब कुछ सिखाती है। कहने को तो दुनियादारी में हर कोई जिम्मेदारी निभाता है पर असल में हर कोई अपने मुंह मियां मिट्ठू बन कर खुद को सबसे बेहतर और समझदार साबित करने की कोशिश करता है। जो कोई जरा-सा हल्का या कमजोर होता है दुनिया उस पर भारी पड़ने लगती है।

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जब कुछ देर तक सेठजी ने यमदूत की बातों का जवाब नहीं दिया तो उन्होंने खोद-खोद कर पूछना शुरू किया कि तुमने बताया नहीं कि आखिर दुनियादारी किस चिड़िया का नाम है? जब सेठजी से कोई जवाब नहीं बन पाया तो यमदूत ने गुस्सा करते हुए कहा कि तुम ठहरे अकल के अंधे। तुम लोगों की अकल तो घास चरने गई है तुम मुझे किस मुंह से समझाओगे कि दुनियादारी क्या होती है? तुम्हारे जैसे लोग जो अभी तक खुद से अनजान है वो किसी को दुनियादारी के बारे में क्या बता सकते हैं। यमदूत ने सेठजी से सवाल करते हुए कहा कि तुम बातें तो साधु-संतों की तरह बहुत बड़ी-बड़ी करते हो, लेकिन क्या तुम्हारे यहां एक-दूसरे को बेवकूफ बना कर अपना फायदा बढ़ाने और स्वार्थ सिद्ध करने को दुनियादारी कहा जाता है? मैं तो हैरान हूं कि आप लोग कैसे सगे-रिश्तेदारों को भी अपना दुश्मन मान कर हर समय पैसे और प्रतिष्ठा की दौड़ में एक-दूसरे को पछाड़ कर आगे बढ़ने को दुनियादारी कैसे कहते हो? यमदूत महाराज के बहुमूल्य प्रवचन सुन कर जौली अंकल भी एकमत होते हुए यही कहते हैं कि हमें अपने घर, कपड़े, शरीर की साफ-सफाई और संभाल आदि के बारे में तो हर प्रकार का ज्ञान है, परंतु हम अपने प्रियजनों के प्रेम-प्यार को भूलते जा रहे हैं। विद्वान लोग सच ही कहते हैं कि हमारा जीवन एक इंद्रधनुष की तरह है।

इसके रंगों को प्रस्तुत करने के लिए सूर्य और बारिश दोनों की जरूरत होती है। ठीक उसी प्रकार दुनियादारी का राग अलापने वाले हर व्यक्ति को चाहिए कि जीवन में सबसे पहले ईमानदारी को अपनाया जाये तभी सही मायनों में दुनियादारी निभ पायेगी।हमें कभी भी अपने व्यवहार में उग्रता नहीं हमेषा मैत्री दिखाई देनी चाहिए, क्योंकि इसी से जीवन में ठहराव आता है।

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