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हमदर्दी - कहानियां जो राह दिखाएं

09:00 PM Jul 08, 2024 IST | Reena Yadav
हमदर्दी   कहानियां जो राह दिखाएं
hamadardee
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Hindi Story: दिल का ऑपरेशन करवाने के बाद मिश्रा जी जैसे ही अस्पताल से घर पहुंचे तो उनके घर पर हमदर्दी की रस्म निभाने वालों की भीड़ इस तरह से जुटने लगी जैसे शहर में कोई मेला लगा हो। मिश्रा जी का हाल जानने के लिये हर कोई सबसे पहले इस तेजी से दौड़ रहा था जैसे उनके वहां पहुंचते ही टीवी वाले ब्रेकिंग न्यूज बना कर सारे देश में उन्हें दिखा देंगे। हर कोई इस रेस में अधिक से अधिक अंक पाना चाहता था। इस प्रतियोगिता में सबसे पहले बाजी मारी मिश्रा जी के साले ने।

वो अपनी पत्नी और छह बच्चों को लेकर मिश्रा जी का हालचाल पूछने के लिये आ गये। मेहमानों की इतनी बड़ी फौज को देखते ही मिश्रा की पत्नी ने अपनी भाभी से कहा कि लज्जा नहीं आई। उनकी भाभी ने कहा कि लज्जा को कल से बहुत तेज बुखार है, इसलिये वो हमारे साथ नहीं आ पाई। मिश्रा जी के साले ने हमदर्दी जताते हुए कहा कि जीजा जी के चेहरे की रौनक को देख कर तो यह बिल्कुल नहीं लगता कि यह अस्पताल से दिल का ऑपरेशन करवा कर आये हैं, बल्कि ऐसा लग रहा है जैसे किसी बढ़िया से हिल स्टेषन पर छुट्टियां मना कर आ रहे हो। मिश्रा जी ने अपने साले की ओर इशारा करते हुए कहा-‘कभी भी किसी हंसते हुए चेहरे को देख कर यह मत सोचो कि इनको कोई परेशानी नहीं होगी, बल्कि ऐसे लोगों में यह काबिलियत होती है कि वो हर परेशानी को ठीक से हल कर सकते हैं। कोई भी धैर्यवान व्यक्ति चाहे तो दुःख के पलों को सुख में बदल सकता है। परेशानी और कष्ट तो बाकी लोगों की तरह इन पर भी आते हैं, परंतु यह तुम्हारी तरह जल्दी विचलित नहीं होते। वैसे भी जो अपनी सभी परेशानियां भगवान के भरोसे छोड़ देते हैं, भगवान उनका भरोसा कभी नहीं तोड़ते।’ मिश्रा जी की बात को बीच में ही रोकते हुए उनके साले ने कहा कि आप हमेशा हर बात में भगवान का जिक्र करते हो। क्या आज तक आपने कभी भगवान को देखा है? इस पर मिश्रा जी ने कहा कि कौन कहता है कि ईश्वर नजर नहीं आता, उस समय सिर्फ वही नजर आता है जब कुछ नजर नहीं आता।

मिश्रा जी के साले ने गपशप करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले जब डॉक्टर से बात हुई थी तो आप कह रहे थे कि दवाइयों से ही काम चल जायेगा। फिर यह अचानक ऑपरेशन करवाने की क्या जरूरत आन पड़ी? अब मिश्रा जी की पत्नी ने अपने भाई को समझाते हुए कहा कि तुम अपने जीजा जी को जानते ही हो। इनके कुछ खास उसूल हैं और उनमें से सबसे खास उसूल यह है कि बीमारी और कर्ज को कभी भी ज्यादा देर तक मत चलने दो, इन्हें जल्द से जल्द खत्म करने में ही बेहतरी होती है।

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अभी इन लोगों से बातचीत चल ही रही थी कि मिश्रा जी के दफ्तर से कुछ लोग उनकी तबीयत के बारे में जानने के लिये आ गये। उधर पहले से आये हुए मेहमानों और उनके बच्चों ने कांव-कांव करके सारा घर सिर पर उठा रखा था। मिश्रा जी की पत्नी ने नये मेहमानों को देखते ही मिश्रा जी से कहा कि मेरा तो पहले से ही नाक में दम हुआ जा रहा है। जब से आप अस्पताल से आये हो तभी से कोल्हू के बैल की तरह दिन-रात काम कर रही हूं। अब तो थकावट के मारे मेरी कमर भी टूटने लगी है। अभी एक बार का खाना भी निपट नहीं पाता कि बच्चों के पेट में फिर से चूहे कूदने लगते हैं। हमारे यहां कोई ऊपर की कमाई तो है नहीं जो झट से फोन घुमा कर बाजार से खाना मंगवा लूं। मिश्रा जी पत्नी को उसके इस व्यवहार पर गुस्से में कुछ कहने की बजाए एकटक हैरान होकर देखे जा रहे थे। जब उनकी पत्नी की सारी बात खत्म हो गई तो मिश्रा जी ने उससे कहा कि यह जरूरी नहीं कि हमारे जीवन में सब कुछ हमारी इच्छा मुताबिक ही हो। जीवन में यदि किसी को कुछ नापसंद हो उसे बदल देना चाहिये, यदि आप उसे बदल नहीं सकते तो उसके बारे में अपने सोचने का तरीका बदल लेना चाहिये।

इतना सुनते ही मिश्रा जी के साले ने कहा कि जीजा जी आपको क्या लगता है कि यह सभी मिलने वाले आपसे सच्ची हमदर्दी जता रहे है? इस बात पर मिश्रा जी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उससे कहा कि हो सकता है कि कुछ लोग औपचारिकता निभाने की मंशा से आए हो। परंतु हम यह कैसे भूल सकते हैं कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है इसलिये वो समाज की उपेक्षा करके नहीं जी सकता। हमारी जिंदगी तीन चीजों से चलती है, जीत, हार और हर चीज को आपस में बांटना। अरे भाई, जीतना है तो दूसरों का दिल जीतो, हारना है तो बुरी आदतों से हारो, बांटना है तो अपने प्रियजनों के साथ खुशियां बांटो। मैं पहले भी तुम्हें कई बार समझा चुका हूं कि कभी भी पानी देखते ही कपड़े नहीं उतार देने चाहिये। मेरा कहने का मतलब यह है कि तुरंत प्रतिक्रिया देने से सदा बचना चाहिये इससे बहुत हद तक कटुता खत्म हो जाती है। इंसान के पास चाहे कितने ही साधन क्यूं न हो, साधनों का होना आपको सुखी नहीं कर सकता और न ही उनका त्याग आपको सुखी कर सकता है। क्योंकि सुख और दुःख तो मात्र मन की दशा है। एक बार फिर से तुम्हें बताता हूं कि दूसरों के साथ सदैव वैसा ही बर्ताव करों जैसा कि आप स्वयं उनसे चाहते हो, दूसरों के साथ वैसा बर्ताव कभी न करें जैसा दूसरों से नहीं चाहते हो। इतना तो तुमने भी जरूर देखा होगा कि कई बार ढेरों खुशियां मिल कर भी एक दर्द को कम नहीं कर सकती, लेकिन एक दर्द भरी बात हजारों खुशियों को पल भर में राख कर देता है।

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मिश्रा जी की बातें सुनने के बाद तो यही लगता है कि उनकी पत्नी इतना तो जरूर जान गई होगी कि जिंदगी में यह जरूरी नहीं कि हम किसी से कितने अच्छे रिश्ते रखते हैं। सबसे महत्त्वपूर्ण तो यह होता है कि हम रिश्तों को कितने अच्छे से निभा पाते हैं। सुखों में तो हर कोई एक-दूसरे का साथ देता है, प्यार देते हैं, गले लगाते हैं, परंतु जो कष्ट और दुःखों में साथ देता है वही सच्चा इंसान होता है।

जीवन में कभी भी दिखावे और पहनावे से कुछ नहीं होता, केवल अच्छे और नेक विचारों से ही व्यक्ति की पहचान बनती है। इंसान चाहे तो जीते जी तो दूसरों की मदद कर ही सकता है, मृत्यु के बाद भी अपने जरूरी अंग दान करके न सिर्फ समाज के प्रति हमदर्दी बल्कि उसकी बहुत बड़ी सेवा कर सकता है। अब तो जौली अंकल भी यह जान गये हैं कि हमदर्दी कोई कोरा शिष्टाचार नहीं बल्कि एक ऐसी भावना है जिसे केवल महसूस किया जा सकता है। यह सच्चे रिश्तों की आधारशिला होती है। इसलिये एक सच्चे इंसान को दूसरे का दुःख-दर्द जानते ही झूठी सहानुभूति दिखाने की बजाए बिना कुछ कहे सच्चे दिल से हमदर्दी करनी चाहिये। जो व्यक्ति भगवान की बनाई हुई मूर्ति को छोड़ कर इंसान द्वारा बनाई हुई मूर्ति की पूजा करता है वो भगवान को कभी प्रिय नहीं हो सकता।

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