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हेल्थ इंश्योरेंस और टर्म इंश्योरेंस, खरीदने से पहले जान लीजिए क्या है अंतर: Health Insurance and Term Insurance

03:00 PM Sep 12, 2023 IST | Pinki
हेल्थ इंश्योरेंस और टर्म इंश्योरेंस  खरीदने से पहले जान लीजिए क्या है अंतर  health insurance and term insurance
Health Insurance and Term Insurance
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Health Insurance and Term Insurance: इंश्योरेंस का मतलब है किसी भी अनजान खतरे से सुरक्षा। आजकल लोग स्वास्थ्य से लेकर गाड़ी तक की इंश्योरेंस खरीदते हैं, जो किसी भी अनजान खतरे के चलते हुए नुकसान की भरपाई करता है। आपने अपने आस-पास हेल्थ इंश्योरेंस और टर्म इंश्योरेंस के बारे में जरूर सुना होगा। पर क्या आप इन दोनों के बीच फर्क को जानते हैं, वैसे तो ये दोनों ही व्यक्ति के लिए लाभदायक होती है लेकिन इन्हें जरुरत के हिसाब से चुना जाता है। अगर नहीं तो आज हम आपको हेल्थ इंश्योरेंस और टर्म इंश्योरेंस के बीच के फर्क को आम भाषा में समझाएंगे। जिसके बाद आपको हेल्थ इंश्योरेंस और टर्म इंश्योरेंस लेते हुए कोई परेशानी नहीं होने वाली। वैसे तो भविष्य की किसी भी परेशानी से निपटने के लिए इंश्योरेंस लिया जाता है। लेकिन इसके मिच्योर होने पर आपको अच्छा रिटर्न और टैक्स मिलता है।

इंश्योरेंस क्या है

इंश्योरेंस खरीदकर व्यक्ति संभावित खतरे से होने वाले आर्थिक जोखिम को दूसरे पक्ष यानी बीमाकार पर डाल सकता है। बीमाकार एक कंपनी होती है, जो बीमाधारक यानी इंश्योरेंस खरीदने वाले व्यक्ति के आर्थिक नुकसान को बांटने का काम करती है। इंश्योरेंस बीमाकर्ता और बीमाधारक के बीच एक कॉन्ट्रैक्ट होता है। इस कॉन्ट्रैक्ट में बीमाधारक को होने वाले किसी भी नुकसान की भरपाई के लिए बीमाकर्ता एक राशि लेता है जिसे प्रीमियम कहा जाता है।

हेल्थ इंश्योरेंस

मौजूदा समय में इलाज आम आदमी के लिए बहुत महंगा हो चुका है। बुखार-जुकाम और चौथी बिमारियों का इलाज तो लोग करा लेते हैं लेकिन बड़ी बिमारियों के इलाज में लोगों को जमापूंजी खत्म हो जाती है। ऐसे में किसी भी संभावित बड़ी बीमारी के इलाज के हेल्थ इंश्योरेंस लिया जाता है। अगर किसी व्यक्ति को बीमारी हो गई है तो उसके इलाज का खर्चा बीमा कंपनी (जिस कंपनी से हेल्थ इंश्योरेंस ख़रीदा गया है) उठाएगी।

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टर्म इंश्योरेंस

टर्म इंश्योरेंस हर किसी इंश्योरेंस से थोड़ा अलग होता है। ये एक सीमित अवधि के लिए कवरेज प्रदान करती है, जिसके लिए निश्चित भुगतान करना होता है। इस पॉलिसी के अंतर्गत अगर पॉलिसी धारक की बीमित अवधि में मृत्यु हो जाती है तो कवरेज का अमाउंट नॉमिनी को दिया जाता है। ऐसे में परिवार को वित्तीय सुरक्षा मिल जाती हो। लोग अक्सर ही परिवार के ही किसी व्यक्ति को नॉमिनी बनाता है। अगर पति-पत्नी में से कोई एक नौकरी कर रहा है तो नौकरीशुदा व्यक्ति को टर्म इंश्योरेंस खरीद लेना चाहिए।

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