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कैसे डायग्नोज होता है यूट्रस में ट्यूमर, जानिए इसके लक्षण और इलाज: Tumor in Uterus

09:00 AM May 22, 2024 IST | Anuradha Jain
कैसे डायग्नोज होता है यूट्रस में ट्यूमर  जानिए इसके लक्षण और इलाज  tumor in uterus
Symptoms and Treatment of Tumor in Uterus
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Tumor in Uterus: बॉलीवुड एक्ट्रेस और इंटरनेट सेंसशन राखी सावंत को हाल ही में यूट्रस में ट्यूमर डायग्नोज हुआ। डॉक्टर्स अभी और जांच कर रहे हैं कि कहीं ये ट्यूमर, कैंसर तो नहीं. चलिए जानते हैं, यूट्रस में ट्यूमर को किन तरीकों से डायग्नोज किया जाता है और क्या है इसका इलाज।

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यूट्रस में ट्यूमर के लिए डायग्नोज

Tumor in Uterus
Diagnose of Tumor in Uterus

यूट्रस में मौजूद ट्यूमर को कई तरह से डायग्नोज किया जा सकता है, जैसे -

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  • सामान्य जांच के दौरान - जो गैर-कैंसरयुक्त ट्यूमर होते हैं उन्हें ऐसिम्प्टमैटिक फाइब्रॉएड भी कहा जाता है। ऐसे ट्यूमर का डायग्नोज आमतौर पर जब डॉक्टर किसी अन्य बीमारी के लिए पेल्विक जांच करते हैं वे त्वचा के नीचे अगर एक सख्त गांठ को महसूस करते हैं तो ये गांठ ऐसिम्प्टमैटिक फाइब्रॉएड हो सकते हैं। कई बार कुछ बीमारियों की जांच के लिए इमेजिंग टेस्ट किए जाते हैं, इन टेस्ट में भी के दौरान भी ऐसिम्प्टमैटिक फाइब्रॉएड को आसानी से डायग्नोज किया सकता है।
  • पेल्विक अल्ट्रासाउंड के दौरान - यदि आप कुछ लक्षणों के साथ अपने डॉक्टर के पास आते हैं या यदि आपके डॉक्टर को शारीरिक परीक्षण के बाद फाइब्रॉएड होने का संदेह होता है, तो डॉक्टर इमेजिंग टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। आमतौर पर, इमेजिंग टेस्ट में पेल्विक अल्ट्रासाउंड किया जाता है, इस दौरान यूट्रस में ट्यूमर को डायग्नोज किया जा सकता है। पेल्विक अल्ट्रासाउंड के दौरान, पेट पर या योनि के अंदर एक छोटा उपकरण डाला जाता है ताकि पेल्विक एरिया की इमेज की फिल्म निकाली बनाई जा सकें।
  • एमआरआई - कुछ मामलों में, डॉक्टर एमआरआई करवाने की सलाह भी देते हैं। एमआरआई फाइब्रॉएड के सटीक आकार और संख्या की सही जानकारी देते हुए इमेज की फिल्म बना सकता है। एमआरआई से डॉक्टर ये भी जान पाते हैं कि ये सचमुच फाइब्रॉएड हैं या फिर एडिनोमायोसिस जैसी कोई अन्य समस्या है।
  • हिस्टेरोसाल्पिंगोग्राफी - यह यूट्रस और फैलोपियन ट्यूब का एक प्रकार का एक्स-रे है।
  • हिस्टेरोस्कोपी- यह वैजाइना में हिस्टेरोस्कोप उपकरण का उपयोग करके सर्विक्स की कैनल और गर्भाशय के अंदरूनी हिस्से की जांच की जाती है।

आमतौर पर, ये जांचें फाइब्रॉएड को डायग्नोज करने के लिए काफी हैं। इन टेस्ट का उपयोग कैंसरग्रस्त ट्यूमर की पहचान करने के लिए भी किया जा सकता है क्योंकि इमेजिंग रिजल्ट में फाइब्रॉएड और कैंसरग्रस्त ट्यूमर अलग दिखाई देते हैं। लेकिन यदि इन जांचों के रिजल्ट पर्याप्त या स्पष्ट नहीं हैं या डॉक्टर को अधिक जानकारी की आवश्यकता है तो डॉक्टर अतिरिक्त इमेजिंग टेस्ट करवाने की सलाह भी दे सकते हैं।

यूट्रस में ट्यूमर का इलाज

फाइब्रॉएड का इलाज कई बातों पर निर्भर होता है। ज्यादात्तर मामलों में देखा गया है कि फाइब्रॉएड के लिए किसी भी इलाज की जरूरत नहीं होती। आमतौर पर, फाइब्रॉएड कैंसर में नहीं बदलते और अधिकत्तर फाइब्रॉएड के लक्षण दिखाई नहीं देते। साथ ही एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के कम उत्पादन के कारण मेनोपॉज के करीब आने पर फाइब्रॉएड बढ़ना बंद हो जाते हैं और यहां तक कि सिकुड़ भी जाते हैं। हालांकि, हमेशा ऐसा हो, ये जरूरी नहीं है।
यदि आपको फाइब्रॉएड के लक्षण दिखाई देते हैं या तकलीफ देते हैं तो डॉक्टर डायग्नोज के जरिए जांचेंगे कि कहीं वो कैंसर तो नहीं या लक्षण क्यों दिखाई दे रहे हैं, उसी के मुताबिक इलाज किया जाता है। जैसे - बड़ा ट्यूमर होना, फाइब्रॉएड का तेजी से बढ़ना और बहुत ज्यादा फाइब्रॉएड होना। ऐसी स्थिति होने पर कुछ उपचार विकल्प हो सकते हैं, जैसे -

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  • फाइब्रॉएड को सिकोड़ने के लिए दवाएं
  • ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स
  • ओवर-द-काउंटर नॉनस्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग या पेन किलर्स
  • फाइब्रॉएड को सिकोड़ने के लिए यूटरिन आर्टरी एम्बोलिजेशन
  • फाइब्रॉएड को नष्ट करने के लिए रेडियोफ्रीक्वेंसी ऐब्लेशन
  • फाइब्रॉएड को हटाने के लिए मायोमेक्टोमी सर्जरी
  • फाइब्रॉएड से जुड़े असामान्य यूट्रस ब्लीडिंग को रोकने के लिए एंडोमेट्रियल एब्लेशन मैथेड
  • यूट्रस को हटाने के लिए हिस्टेरेक्टॉमी

क्या कहना है डॉक्टर का

पुणे स्थित, डीवाई पाटिल हॉस्पिटल की प्रैक्टिसनर डॉ. आस्था सिंघल का कहना है कि यूट्रस में मौजूद ट्यूमर आमतौर पर ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स और अन्य गंभीर सर्जरी, हिस्टेरेक्टॉमी जैसी दवाओं से ठीक हो जाता है और बहुत कम ही यह घातक होता है। इसको कई टेक्नीक्स से डायग्नोज किया जा सकता है, जैसे - यूएसजी, हिस्टेरोस्कोपी, हिस्टेरोस्कोपिक बायोप्सी और फ्रैक्शनल क्यूरेटेज।

निष्कर्ष

अधिकांश फाइब्रॉएड सौम्य यानी गैर-कैंसरयुक्त ट्यूमर होते हैं। अधिकत्तर फाइब्रॉएड में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, इसीलिए आमतौर पर इलाज की जरूरत नहीं होती है और यह कोई गंभीर चिंता करने की बात नहीं है। यहां तक ​​कि जब फाइब्रॉएड के लक्षण दिखते हैं तो उन्हें आमतौर पर इलाज या सर्जरी के साथ प्रबंधित किया जा सकता है। लेकिन यदि टेस्ट के दौरान फाइब्रॉएड के साथ ही कैंसरयुक्त ट्यूमर भी रिजल्ट में आता है तो इसके बिना देर किए सर्जरी के जरिए हटाए जाने की सलाह दी जाती है।

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