For the best experience, open
https://m.grehlakshmi.com
on your mobile browser.

झमेले पर झमेला - कहानियां जो राह दिखाएं

09:00 PM Jul 11, 2024 IST | Reena Yadav
झमेले पर झमेला   कहानियां जो राह दिखाएं
jhamele par jhamela
Advertisement

Hindi Story: जय को जैसे ही मालूम हुआ कि उसका दोस्त वीरू शादी कर रहा है तो वो उसे मुबारकबाद देने के लिये उसके घर पहुंच गया। घर के अंदर जाते ही जय ने वीरू के कुत्ते को देखते ही कहा कि तुम्हारा कुत्ता तो बिल्कुल शेर की तरह दिखता है।

क्या खिलाते-पिलाते हो इसको? वीरू ने कहा-‘यह कमीना शेर ही है, जब से इसकी शादी हुई है, यह कुत्ते जैसा दिखने लगा है।’ जय ने वीरू से कहा कि मैं तो तुम्हारी शादी की खुशखबरी सुनकर तुम्हें मुबारक देने आया हूं, परंतु तुम तो ऐसे मुरझाये बैठे हो जैसे कि तुम्हारी भैंस गुम हो गई हो। वीरू ने अपने दोस्त से कहा कि यार मेरे घरवालों ने मेरी शादी तो तय कर दी है, लेकिन मुझे शादी से बहुत डर लग रहा है। मैंने सुना है कि शादी के बाद आदमी लुट जाता है, बर्बाद हो जाता है। क्या यह सच है कि शादीशुदा इंसान की जिंदगी में सिर्फ झमेले ही झमेले होते हैं।

जय ने वीरू से पूछा कि क्या तुम्हारे घरवाले तुम्हारी शादी तुम्हारी मर्जी के बिना कर रहे हैं? वीरू ने बात साफ करते हुए जय से कहा कि असल में मैं बसन्ती नाम की एक लड़की से प्यार करने लगा था। जब उसके घरवालों को मालूम हुआ तो उन्होंने मेरे मां-बाप पर शादी का दबाव बना दिया। वैसे एक बात बता कि आदमी को प्यार क्यूं हो जाता है? जय ने थोड़ी चुस्की लेते हुए कहा-‘जब किसी इंसान के राहु, केतु और शनि की दिशा बिल्कुल उलट चल रही हो। उसका मंगल ग्रह कमजोर पड़ गया हो और भगवान मजे लेने के मूड में हो तो उस समय इंसान को प्यार का रोग लगता है।’ वीरू ने घबरा कर जय से पूछा कि तुम्हें क्या लगता है, क्या मेरी किस्मत इतनी खराब चल रही है जो मुझे प्यार हो गया है। जय ने कहा कि यह तो दिल का मामला होता है भाई। इसमें मैं क्या कह सकता हूं। इस बारे में तुम अपने दिल से ही पूछो तो अच्छा रहेगा। वीरू ने जवाब दिया कि मैंने अपने दिल से भी इस बारे में पूछा था कि यह प्यार-व्यार आखिर क्या बीमारी होती है। मेरे दिल ने मुझ से कहा कि मेरा काम सिर्फ खून सप्लाई करना है, मेरे से इस तरह की छिछोरी बातें मत किया करो। अब तुम ही बताओ कि मैं इस बारे में बात करूं तो किस से करूं? जय ने वीरू की परेशानी को थोड़ा कम करने की कोशिश में उससे कहा कि तुम मुझे बताओ कि शादी के बारे में क्या जानना चाहते हो?

Advertisement

वीरू ने कहा-‘बस तुम मुझे इतना बता दो कि शादी के बाद किस तरह के झमेले आदमी को झेलने पड़ते हैं।’ जय ने कहा कि इस बारे में बहुत ज्यादा तो मैं भी नहीं जानता, लेकिन इतना जरूर सुन रखा है कि शादी करवाते ही आदमी कई प्रकार के झमेलों में फंस जाता है। सबसे पहले तो बीवी के कपड़ों, गहनों और मेकअप का इतना खर्च होता है कि आदमी उसे आसानी से बर्दाश्त नहीं कर पाता। यदि बीवी यह सब कुछ नहीं करती तो आदमी के लिये बीवी को बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाता है। वीरू ने जय को रोकते हुए कहा कि बीवी जब धर्मपत्नी बन कर पति के घर आ जाती है तो ऐसे में उसे इतना तालमेल रखना ही चाहिए कि पति की कमाई के हिसाब मुताबिक हालात से समझौता करके चले।

जय ने वीरू को समझाते हुए कहा कि इतना तो तुम ने जरूर सुना होगा कि धर्म पिता कभी सगा पिता नहीं हो सकता, धर्म भाई कभी सगा भाई नहीं बन सकता, धर्म की बहन कभी सगी बहन की जगह नहीं ले सकती तो फिर धर्मपत्नी किस तरह तुम्हारी सगी हो सकती है। इसलिये कभी भी इस गलतफहमी में न रहना कि तुम्हारी पत्नी हर काम तुम्हारी मनमर्जी के मुताबिक करेगी। यह सब बातें सुनकर वीरू ने घबरा कर जय से पूछा कि तुम्हारे कहने का क्या मैं यह मतलब निकालूं कि पति को पत्नी के हाथों से कोई नहीं बचा सकता। जय ने कहा कि तुम मेरी बातों पर क्यूं एतबार करते हो। कभी इतिहास की कहानियां पढ़ी हो तो तुम्हें इतना जरूर मालूम होगा कि सावित्री अपने पति को यमराज से भी छीन कर वापिस ले आई थी। अब जिस आदमी को यमराज भी नहीं बचा सके, उसे और कौन बचा सकता है। वीरू ने जय से कहा कि हो सकता है तुम्हारी यह सारी बातें ठीक हो। लेकिन यह भी तो सच है कि पति घर का मुखिया यानी हेड ऑफ फेमिली होता है। जय ने कहा-‘बिल्कुल ठीक कहा तुमने, लेकिन लगता है तुमने पूरी बात नहीं सुनी। पति यदि हेड ऑफ फेमिली होता है तो पत्नी उस परिवार की गर्दन होती है। वो हेड ऑफ फेमिली को जिस तरह चाहे घुमा सकती है।’ यह सब कुछ सुनने के बाद वीरू को जब यह महसूस हुआ कि पत्नियां इतना नाक में दम करती हैं तो उसके हाथ-पांव ठंडे होने लगे। उसके सिर से प्यार का भूत ऐसे गायब हो गया जैसे गधे के सिर से सींग।

Advertisement

वीरू की यह हालत देखकर जय ने मजाक को खत्म करते हुए उससे कहा कि अब थोड़ा गंभीर होकर मेरी बात सुनो। सुख-दुःख तो हमारे जीवन में धूप और छांव की तरह होते हैं। हमारी जिंदगी में सभी दुःख हमारी अज्ञानता के कारण ही आते हैं। हम पारिवारिक रिश्तों को अहमियत देने की बजाए अधिक से अधिक धन, दौलत और प्रतिष्ठा जैसी चीजों को पाने में खो जाते हैं जो कि स्थायी नहीं होती। फिर जब यह सब कुछ हमारे हाथ से छूटने लगती है तो हमें बहुत दुःख होता है।

ऐसे में हर व्यक्ति को चाहिये कि इस बात को समझे कि जिस तरह पैसा और अन्य रोजमर्रा की चीजें हमारे लिये आवश्यक है, उसी तरह घर में प्यार भी हमारे जीवन का सबसे जरूरी हिस्सा है। जिस घर में प्रेम नहीं होता वहां शांति नहीं हो सकती, जहां पवित्रता नहीं, वहां प्रेम नहीं हो सकता। जय द्वारा दी गई इस महत्त्वपूर्ण जानकारी के साथ जौली अंकल भी वीरू को एक बात बताना चाहते हैं कि आदर प्राप्त करने का एकमात्र उपाय यही है कि हम पहले दूसरों का आदर करें। एक बार जब हमारा स्वभाव मधुर व प्रेमयुक्त बन जायेगा तो फिर हमारे जीवन में झमेले पर झमेला आने की बजाए हर प्रकार के झमेले खुशियों में बदल जायेंगे। जो कोई वर्तमान को ठीक से समझे और परिस्थिति के अनुसार खुद को ढ़ाल ले वही सच्चा ज्ञानी होता है।

Advertisement

Advertisement
Tags :
Advertisement