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जिंदगी है चार दिन - कहानियां जो राह दिखाएं

09:00 PM Jul 04, 2024 IST | Reena Yadav
जिंदगी है चार दिन   कहानियां जो राह दिखाएं
jindagee hai chaar din
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Hindi Story: एक दिन वीरू अपने कुछ दोस्तों के साथ बैठा गपशप कर रहा था कि अचानक उसके कानों में एक आवाज सुनाई दी कि भैया जी, चौधरी साहब का घर किस तरफ है? वीरू ने सब कुछ जानते हुए भी उस आदमी को बिल्कुल उल्टी तरफ जाने के लिये कह दिया।

पास बैठे हुए उसके एक दोस्त ने कहा कि इस सज्जन ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था जो तुम ने इसे सीधा रास्ता बताने की बजाए उसे उल्टी तरफ भेज दिया है। अब वो न जाने कितनी देर इधर-उधर भटक कर परेशान तो होगा। साथ में उसका कितना कीमती समय भी बर्बाद हो जायेगा। वीरू ने कहा कि जिंदगी में मजे लेने हैं तो यह सब कुछ तो करना ही पड़ता है। वैसे तू फिक्र मत कर, अभी जब वो कुछ देर घूम-फिर कर इधर आयेगा तो फिर उसे सही रास्ता समझा देंगे। वीरू के दोस्त ने उससे कहा कि दोस्ती-यारी के चलते आपस में मज़ाक करना तो ठीक है, लेकिन एक अनजान व्यक्ति को इस तरह से दुःखी कर के तुम्हें क्या खुशी मिलेगी यह अपनी समझ से बाहर है। वीरू ने उसकी बात का जवाब मसखरी में देते हुए कहा कि लगता है तुमने बुजुर्गों की वो बात नहीं सुनी जिसमें अक्सर वो समझाते हैं कि चार दिन की जिंदगी है इसे हंसते-खेलते गुजारो।

वीरू के दोस्त ने कहा कि चलो यदि तुम्हारी बात मान ली जाये कि जिंदगी चार दिन की है तो फिर एक बात बताओ कि हमारे किक्रेट के खिलाड़ी टैस्ट मैच पांच दिन का क्यूं रखते हैं? वीरू ने उससे कहा कि शक्ल से तो तू बड़ा ही ढीला-ढाला सा लगता है, लेकिन यह बात तो तूने बहुत कमाल की कही है। भई इस बात पर तो अच्छे से गौर करना पड़ेगा कि यदि सच में जिंदगी चार दिन की है तो खिलाड़ी टैस्ट मैच पांच दिन कैसे खेल सकते हैं? वीरू को गहरी सोच में डूबे देख उसके दोस्त ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपकी जिंदगी कितनी लंबी या छोटी है। हमें तो सिर्फ इस बात का ख्याल रखना चाहिये कि समय ही हमारे जीवन का असली और एक मात्र सिक्का है। अब यह हमें ही यह तय करना है कि हम इसे कितना संभाल पाते हैं। यदि इसे संभालने में जरा-सी भी चूक हो जाये तो दूसरे लोग इसे खर्च करके खत्म कर देते हैं। वीरू ने कहा कि तू तो अच्छे से जानता है कि मुझे तुम्हारी यह ज्ञान-ध्यान की बातें जरा कम ही समझ आती है। अगर हो सके तो इसे सीधी-सादी भाषा में कह दे कि तू आखिर कहना क्या चाहता है?

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वीरू के दोस्त ने उससे कहा कि अगर यह बात है तो मैं तुम्हें यह सारा किस्सा एक कहानी के माध्यम से बताता हूं। एक बार एक गांव में बहुत ही गरीब किसान रहता था। एक दिन एक स्वामी जी वहां से निकले तो उनकी नज़र उस गरीब और लाचार किसान पर पड़ी। गरीबी से फटेहाल में उसे रहते देख कर स्वामी जी को उसकी हालात पर बहुत तरस आया। उन्होंने अपने झोले से लोहे को सोना बनाने वाला पारस उसे देते हुए उससे कहा कि आज से अगले सात दिन तक वो जिस भी लोहे की चीज को इस पारस से छुएगा वो सोने की बन जायेगी। इससे तुम्हारी गरीबी हमेशा-हमेशा के लिये खत्म हो जायेगी। इतना कह कर स्वामी जी वहां से चले गये। गरीब किसान ने यह सारा किस्सा अपनी पत्नी को सुनाया। किसान की पत्नी ने कहा कि हम अपने गांव में ऐसा कुछ भी नहीं कर सकते क्योंकि यदि यहां के लोगों को इस रहस्य के बारे में मालूम हो गया तो वो हमें जान से मार देंगे। तुम ऐसा करो कि गांव से दूर दूसरे शहर में जाकर खूब सारा लोहा खरीद कर उसे सोने में बदल कर बेच दो। इसी उधेड़बुन में इस किसान ने 2-3 दिन निकाल दिये।

फिर एक दिन हिम्मत करके वो शहर में लोहा खरीदने के लिये निकल पड़ा। जब उसने अपने कुछ जानकारों के माध्यम से लोहा खरीदने की बात की तो उन्होंने कहा कि आजकल तो भाव बहुत तेज चल रहा है। तुम कुछ दिन रुक कर यदि लोहा खरीदोगे तो काफी सस्ता मिल जायेगा। इसी गड़बड़ी में उसने पूरे छह दिन बेकार कर दिये। जब सातवें दिन वो सोकर उठा तो उसके कानों में स्वामी जी की आवाज गूंजने लगी कि ठीक सातवें दिन आकर मैं अपना यह पारस वापिस ले जाऊंगा। किसान घबरा कर इस मामले में सलाह करने के लिये वापिस अपनी पत्नी के पास पहुंचा। गांव पहुंचते-पहुंचते उसे शाम हो गई। दूसरी ओर स्वामी जी यह सोच कर इसके घर आये कि अब तक तो यह किसान बहुत अमीर बन चुका होगा। लेकिन उनको उस समय बहुत हैरानगी हुई जब उन्होंने इस किसान को पहले जैसी गरीबी वाली हालात में देखा। इस किसान ने स्वामी जी से कुछ और समय के लिये पारस मांगने के लिये बहुत प्रार्थना की, लेकिन वो अपने वादे के मुताबिक अपना पारस लेकर वहां से चले गये। जाते-जाते स्वामी जी ने उस किसान से कहा कि तुम्हारे जैसे लोग जो समय की कद्र करना नहीं जानते हैं वो न तो अपनी सोच और न ही अपने किसी सपने को सच कर पाते हैं। जबकि जो कोई समय की अहमियत को समझते हैं वो बिना एक पल भी व्यर्थ गवायें अपने कर्मों से हर किसी आश्चर्यचकित कर देते हैं।

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वीरू ने कहा- ‘इतनी बड़ी गाथा सुनने के बाद भी मैं यह नहीं समझ पाया कि इस कहानी का मेरे जीवन से क्या लेना-देना है। अब उसके दोस्त ने कहा कि मुझे इसी बात का अफसोस है कि तू सब कुछ जानते हुए भी जिंदगी को एक मजाक से अधिक कुछ नहीं समझता।

कुछ लोग चिंतन करके, कुछ अनुकरण करके जिंदगी के मायने समझ लेते हैं। तुझे अगर मेरी बात फिर भी समझ न आये तो तू एक तितली से बहुत कुछ सीख सकता है। तितली महीने नहीं केवल क्षण गिनती है और वो अपने हर काम के लिये पर्याप्त समय निकाल लेती है। लेकिन तेरे जैसे लोग एक बड़ी कीमत देकर भी जिंदगी और समय की गंभीरता को नहीं जान पाते। मुझे ऐसा लगता है कि इसलिये तुझे मेरी कोई भी बात आसानी से समझ नहीं आती। वीरू अब भी अपने दोस्त की बातों के महत्त्व को समझे या न समझे। लेकिन जौली अंकल आपसे यही विनती करते हैं कि जीवन के हर पल का यदि भरपूर आनंद उठाना है तो उसे पाने के लिये जो आप सोचते हो, जो करते हो और जो कुछ कहते हो उन सभी में हर पल के मूल्य को समझते हुए संतुलन बनाये रखने का प्रयास करो। इसके बाद आपको यह सोचने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि हमारा जीवन बहुत लंबा है या जिंदगी सिर्फ चार दिन की है। जो लोग समय पर काबू नहीं रख पाते, समय उनको काबू में कर लेता है।

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