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कसूरवार - कहानियां जो राह दिखाएं

09:00 PM Jun 20, 2024 IST | Reena Yadav
कसूरवार   कहानियां जो राह दिखाएं
kasooravaar
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Hindi Story: आज इनकम टैक्स के दफ्तर में पेशी की वजह से बनवारी बाबू सुबह से ही काफी तनाव में थे। इतने में उनकी पत्नी की आवाज गूंजी कि नाश्ता तैयार है जल्दी से आकर नाश्ता ले लो, नहीं तो सब कुछ ठंडा हो जायेगा। बनवारी बाबू ने कहा कि आज तो नाश्ता रहने ही दो, मुझे पहले ही बहुत देर हो चुकी है। पत्नी ने अपना पूरा हक जताते हुए कहा कि कोई देर नहीं हो रही।

सारे काम छोड़ कर पहले नाश्ता करो, क्योंकि जाने से पहले आपको ब्लड प्रेशर की दवाई भी खानी है और डॉक्टर ने खाली पेट दवाई खाने से मना किया हुआ है। जैसे ही बनवारी बाबू नाश्ते की मेज पर बैठे, उनकी पत्नी ने कहा कि आज जाने से पहले घर खर्च के लिये पैसे देते जाना। बनवारी बाबू जो पहले से ही दिमागी तौर पर परेशान थे, उन्होंने बीवी से कहा कि अभी दिन शुरू हुआ नहीं और तुमने पैसे मांगने शुरू कर दिये हैं। तुम्हें कई बार समझा चुका हूं कि सुबह-सुबह काम पर जाते समय मेरे से पैसे मत मांगा करो। बीवी ने बिना आव-ताव देखे कहा कि मैंने जब कल शाम को पैसे मांगे थे तो उस समय आप कह रहे थे कि अभी सारे दिन का काम से थका हुआ आया हूं घर आते ही पैसे मांगने शुरू कर दिये हैं। अब आप ही मुझे बताओ कि घर चलाने के लिए तुम से किस समय पैसे मांगू? बनवारी बाबू ने कहा कि जब हमारी नई-नई शादी हुई थी तो तुम बहुत अच्छी थी, कभी भी मेरे से पैसे नहीं मांगती थी।

पत्नी ने कहा कि यह मस्केबाजी छोड़ो और जल्दी से पैसे निकालो। वैसे भी आप खुद ही कहते हो कि जितने चैनल टीवी के, उतने नखरे बीवी के। टीवी चलता है रिमोट से और बीवी चलती है नोट से। बनवारी बाबू ने झट से अपना पर्स निकाला और कुछ रुपये बीवी को देकर अपना बैग उठा कर काम पर जाने लगे। पीछे से उनकी पत्नी ने कहा कि आपने अपनी दवाई तो ली ही नहीं। अपनी दवाई जरूर लेते जाना, वरना फिर से ब्लड प्रेशर बढ़ जायेगा। बनवारी बाबू ने बीवी का हुक्म मानते हुए अच्छे बच्चों की तरह दवाई पी ली। परंतु देरी के कारण चलते-चलते बीवी को आवाज़ देकर बोले कि यह दवा की शीशी ठीक से बंद करके संभाल देना। इतना कहने के साथ दूर से ही अपनी पत्नी और प्यारे से बेटे को बाय-बाय कह कर बनवारी बाबू घर से निकल गये। जैसे ही बनवारी बाबू घर से निकले तो इनकी पत्नी के फोन की घंटी बज उठी। फोन पर अपनी सहेली से गप्पे मारने में इतनी व्यस्त हो गई कि उसे यह भी ध्यान नहीं रहा कि पति महोदय दवाई की शीशी को संभाल कर रखने को कह गये थे। कुछ ही देर में खेलते हुए बनवारी बाबू के बेटे की नजर उस शीशी पर पड़ी। शीशी का ढक्कन खुला देख कर कुछ देर उससे खेलते हुए उसने झट से दवा की शीशी को मुंह से लगा लिया। यह दवा बड़े लोगों को बहुत अधिक ब्लड प्रेशर की बीमारी के दौरान काफी कम मात्रा में दी जाती है। जबकि इनके बेटे ने अनजाने में सारी शीशी एक ही घूंट में खाली कर डाली। दवा पीने के कुछ समय तक तो बच्चा खेलता रहा फिर अचानक नीचे फर्श पर गिर पड़ा। उसके गिरने की आवाज से बनवारी बाबू की पत्नी का ध्यान फोन से हट कर बच्चे की ओर गया।

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जैसे ही वे बच्चे के पास पहुंची तो देखा कि बेटा बेहोश हो चुका है। बिना एक पल की देरी किये वे अपने बच्चे को लेकर नजदीक के अस्पताल में ले गई। डॉक्टरों ने चैकअप करने के बाद कहा कि आपने बच्चे को लाने में बहुत देरी कर दी है। मुझे यह कहते हुए बड़ा ही दुःख हो रहा है, बच्चे की हालात बहुत ही गंभीर हो चुकी है। डॉक्टर के मुंह से यह अल्फाज़ सुन कर बनवारी बाबू की पत्नी सदमे से भौंचक्की होकर गिर पड़ी। डॉक्टरों की मदद से जल्द ही बनवारी बाबू की पत्नी को होश में लाया गया। एक तो बच्चे की बिगड़ती दशा और दूसरा पति का सामना करने के ख़्याल से यह औरत बुरी तरह से दहशत में आ गई थी। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अपने पति से इस अपराध की माफी कैसे मांगे?

बनवारी बाबू समाचार मिलते ही अपने सारे जरूरी कामकाज छोड़ कर एक ही पल में अस्पताल पहुंच गये। सारे रास्ते उनके मन में यह विचार आ रहे थे कि औरतें छोटी से छोटी जिम्मेदारी भी ठीक से क्यूं नहीं निभा पाती। आज पत्नी की एक छोटी-सी भूल के कारण हमारा प्यारा बच्चा हमारे हाथ से निकलता जा रहा है। अस्पताल पहुंचने पर अपने बेटे का बुरा हाल देखते ही बनवारी बाबू के मन में बिजली सी कौंध गई। दीवार के साथ सट कर बिलबिलाती हुई पत्नी की ओर देख कर बनवारी बाबू के मन में एक जबरदस्त बदलाव आया। उन्होंने पत्नी के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा कि इस दुःख की घड़ी में मैं तुम्हारे साथ हूं। तुम यह बिल्कुल मत सोचो की हमारे बेटे की इस दशा के लिये सिर्फ तुम दोषी हो, क्योंकि गलती हम दोनों से ही हुई है और हम दोनों ही बराबर के कसूरवार है। छोटी से छोटी गलती पर अपनी बीवी को बुरा-भला कहने वाले बनवारी बाबू की पत्नी को अपने पति के इस अचानक बदलाव का कारण समझ में नहीं आया। बनवारी बाबू ने अपनी भावनाओं पर काबू रखने के साथ पत्नी को हौंसला देते हुए कहा कि हमारा बेटा इस समय जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। ऐसे में यदि मैं तुम पर गुस्सा भी करूंगा तो भी उसकी हालात सुधरने वाली नहीं, इसलिये इस समय एक-दूसरे के ऊपर इल्जाम लगाना हम दोनों के लिये सिर्फ बेवकूफ़ी ही होगी।

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दुःख की इस घड़ी में बनवारी बाबू के व्यवहार को देख कर जौली अंकल यह सोचने को मजबूर हो गये हैं कि हर हालात में शांत रहना एक ऐसा गुण है, जो करोड़ों लोगों में से किसी एक को नसीब होता है। प्रेम से बोला गया एक शब्द भी हर दुःखी आत्मा को शांति प्रदान कर सकता है। आज यदि हर कोई बनवारी बाबू की तरह अपने मन को स्थिर रखकर सभी परिस्थितियों में धैर्य बनाये रखना सीख ले तो फिर कभी किसी को कसूरवार ठहराने की नौबत कभी नहीं आयेगी। फैसला न ले पाने की स्थिति में केवल अपनी आत्मा की आवाज सुनें।

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