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स्कूल में कंडोलेंस-हाय मैं शर्म से लाल हुई

09:00 PM Jun 27, 2024 IST | Sapna Jha
स्कूल में कंडोलेंस हाय मैं शर्म से लाल हुई
School me Condolance
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Funny Story in Hindi: जब गर्मियों में बच्चों की स्कूल की छुट्टियां होती हैं तब हम सब भाई बहन इकट्ठे होते हैं या तो कहीं घूमने का प्रोग्राम बन जाता है या सब बहनें मिलकर भाई के घर पर ही कब्जा जमा लेती हैं। बच्चों को पूरी आजादी मिल जाती है शैतानी करने की। कहां स्कूल के दौरान बच्चे बस्ते  के बोझ तले दवे रहते हैं। स्कूल,ट्यूशन, होमवर्क इनमें ही बच्चों का पूरा दिन निकल जाता है। इसलिए ही तो बच्चे इंतजार करते हैं गर्मियों की छुट्टियां का।
पहले हम चार-भाई बहन थे अब सबके दो-दो बच्चे मिलकर 8 बच्चों मिलकर खूब घूमा-चौकड़ी मचाते हैं।
एक दिन बच्चों ने पूरा घर सर पर उठा रखा था। सुबह-सुबह  बाथटब लगाकर नहा रहे थे। सारे में पानी फैला रखा था। मेरा पैर पानी में स्लिप हो गया। इसलिए मैं बच्चों को खूब डांटने लगी। बच्चे सहम से गए। पर नानी, दादी के होते कोई बच्चों को डांट लगा दे क्या यह संभव है?
नानी बच्चों की तरफ से साइड  लेते हुए बोली अपनी तो पता नहीं कि तुम सब बहन भाई मिलकर कितनी शैतानियां करते थे। फिर क्या था बच्चों को तो मौका मिल गया है।
मैं बिल्कुल चुप हो गई क्योंकि मैं समझ गई की मम्मी का इशारा किस तरफ है। बचपन की वह घटना मेरे जेहन में घूम गई ‌
जब हम छोटे थे तब बहुत शैतान हुआ  करते थे। हम सब भाई बहन मिल-झुलकर लड़ते-झगड़ते शैतानी करते हुए बड़े हुए थे। हमारी मम्मी हमारी कभी भी स्कूल की छुट्टी नहीं कराती थी। स्कूल की छुट्टी करने के सारे तरीके हम प्रयोग कर चुके थे। एक दिन हम सब बहन भाई स्कूल के लिए तैयार होकर घर से निकल गए और थोड़ी देर बाद ही वापस आ गए। मम्मी ने पूछा क्या हुआ तो हम सब ने पूरी प्लानिंग के साथ जवाब दिया की स्कूल की मैडम मर गई है। आज स्कूल में कंड़ोलेंस है। मम्मी जी स्कूल की सारी मैडम को जानती थी। उन्होंने पूरे दिन मैडम के मरने का शोक मनाया। मम्मी का हृदय बहुत दयावान था।मम्मी बहुत उदास रही पूरा दिन और हमने पूरा दिन मजे काटकर मनाया।
शाम को मम्मी सब्जी लेने सब्जी मंडी गई तो वही मैडम मम्मी को सब्जी  खरीदते हुए मिल गई। मम्मी आश्चर्यचकित रह गई। पहले तो मम्मी घबरा गई लेकिन थोड़ी देर बाद मैडम से उनका हाल-चाल पूछा। अब मम्मी को समझ आ चुकी थी हमारी शैतानी।
घर आकर मम्मी ने हम सब भाई बहनों की जो क्लास लगाई वह आज तक हमें याद है। उसके बाद जब भी हम स्कूल से जल्दी आ जाते हैं तो  मम्मी तुरंत कहती,"अब कौन सी मैडम मर गई "।
आज भी जब हम इस किस्से को याद करते हैं तो  मधुर मुस्कान सभी भाई बहनों के चेहरे पर उभर जाती है। क्योंकि यह मास्टर प्लान हम सब ने मिलकर बनाया था।
लेकिन अगर अब हम अपने बच्चों को डांटते हैं तो बच्चे तुरंत हमारी शैतानी याद करा देते हैं हमें। क्योंकि बच्चों ने अपनी दादी नानी से हमारी कहानी सुन ली थी।
सच में बचपन का दौर भी सुनहरा दौर हुआ करता था। आज बच्चों के साथ मिलकर फिर से इसे जी लिया जाता है।

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