For the best experience, open
https://m.grehlakshmi.com
on your mobile browser.

नवरात्रों में लगता है आमेर के शिला माता मंदिर में मेला, देवी देती हैं आशीर्वाद: Shila Mata Temple

04:00 PM Oct 15, 2023 IST | Yasmeen Yasmeen
नवरात्रों में लगता है आमेर के शिला माता मंदिर में मेला  देवी देती हैं आशीर्वाद  shila mata temple
Shila Mata Temple
Advertisement

Shila Mata Temple: जयपुर में मौजूद आमेर के शिला माता मंदिर का अपना एक अलग ही महत्व है। यह यहां के शासकों की कुलदेवी हैं। माना जाता है कि आमेर का नाम भी इन्हें अम्बा माता के नाम से आमेर पड़ा है। यहां प्रसाद हमेशा से ही गुंजिया मिलती हैं। माता का मंदिर आमेर महल के जलेबी चौक में स्थित है। जहां माता की मूर्ति के पास भगवान गणेश और मीणाओं की कुलदेवी हिंगला देवी की मूर्ति भी है। वैसे तो इस मंदिर में स्थानीय के साथ विदेशी लोगों की भी अपनी एक आस्था है लेकिन नवरात्रों में तो इस मंदिर की महिमा और महत्व और भी बढ़ जाता है। नवरात्रों के पूरे 9 दिन यहां भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। लेकिन नवरात्रे के छठे दिन यहां लक्खी मेला लगता है। जैसा कि नाम से ही सप्ष्ट है इस दिन लाखों की तादाद में श्रद्धालु मां से आशीष लेने आते हैं। यहां प्रतिदिन भोग लगने के बाद ही मन्दिर के दरवाजे खुलते हैं तथा यहां विशेष रूप से गुजियां व नारियल का प्रसाद चढ़ाया जाता है। हालांकि पहले माता को प्रसन्न करने के लिए नवरात्रों में पशु बलि दी जाती थी लेकिन अब काफी समय से यह परंपरा सार्वजनिक रुप से बंद हो गई है। हालांकि जब बलि दी जाती थी उस समय माता को नहारगढ़ से तोपों से सलामी भी दी जाती थी।

राजपरिवार से आती है पोशाक

शिलादेवी को अष्टमी और चतुदर्शी को नवीन पोशाक धारण करवाई जाती है। आपको बता दें कि आजादी से पहले इस मंदिर के दर्शन सिर्फ राजपरिवार के लोग ही किया करते थे लेकिन अब यह मंदिर सभी के लिए खुला है। लेकिन माता की पोशाक जयपुर के राजघराने की ओर से ही आती है। माता की यह पोशाक बहुत ही मनभावन है। इसमें चांदी की लैस और महरूम और लाल रंग का कपड़ा उपयोग होता है। इसके अलावा नवरात्रि में माता को राजपरिवार द्वारा बनवाई गई 500 साल पुरानी जरी की पोशाक धारण करवाई जाती है। अगर आप इस मंदिर में जब आप प्रवेश करेंगे तो आपको मां की शक्ति का अहसास होगा। वहीं यहां सुबह और शाम की आरती में भी आपको इस शक्तिपीठ का प्रभाव नजर आएगा। इस मंदिर के मुख्यद्वार के सामने झरोखे है जिसके अंदर चांदी का नगाड़ा रखा हुआ है। यह नगाड़ा प्रातः एवं सायंकाल आरती के समय बजाया जाता है।

राजा मानसिंह की थी विशेष आस्था

माना जाता है कि मुगबल बादशाह अकबर ने राजा मानसिंह को बंगाल पर जीत हासिल करने के लिए उन्हें वहां भेजा था। वहीं से राजा अपने साथ माता को लेकर आए थे। इनका नाम शिला माता इसलिए है क्योंकि इनकी प्रतिमा शिला पर है। यह मूर्ति महिषासुर मर्दिनी के रूप में बनी हुई है। मूर्ति में देवी महिषासुर को एक पैर से दबाकर दाहिनें हाथ के त्रिशूल से मार रही है। इसलिए देवी की गर्दन दाहिनी ओर झुकी हुई है। यह मूर्ति चमत्कारी मानी जाती है। यह वर्तमान वर्तनमान में पूर्ण रुप से संगमरमर का बना है। इसमें प्रवेश के लिए दरवाजा चांदी का है। माना जाता है कि यह दरवाजा राजा मानसिंह की पत्नी ने अपनी मनोकामना पूरी होने पर बनवाया था। ऐसी मान्यता है कि राजा मानसिंह पर मां की असीम कृपा थी। उन्होंने बहुत से युद्ध लड़े और उन पर विजय हासिल मां के आशीर्वाद से प्राप्त की। वे जब भी कोई युद्ध जीतकर आते थे सबसे पहले मां के दरबार में हाजरी देते थे। लेकिन कालांतकर में जब जयपुर शहर को बसाया जाने लगा उस समय काफी विघ्न आने लगे थे। तब राजा जयसिंह ने कई बड़े पण्डितों से विचार विमर्श कर उनकी सलाह अनुसार मूर्ति को उत्तराभिमुख प्रतिष्ठित करवा दिया। इसके बाद एक सुनियोजित शहर जयपुर की स्थापना हुई।

Advertisement

भैरव के भी करने होते हैं दर्शन

आप अगर नवरात्रों में आमेर महल जाएंगे तो देखेंगे कि किस तरह भक्त मां को प्रसन्न करने के प्रयास करते हैं कोई नंगे पैर वहां तक जाता है तो कोई दंड भेद करता वहां तक पहुंचता है। आपको लग रहा होगा कि मंदिर तक पैदल जाना कोई इतनी बड़ी बात नहीं लेकिन आपको बता दें कि आमेर महल में स्थित मंदिर में पहुंचने के लिए आपको घाटी से भी गुजरना होता है। नवरात्रे के दौरान सुरक्षा का पूरा प्रबंध पुलिस प्रशासन के हाथ में होता है। मां के दर्शन के बाद लोग भैरव के दर्शन भी करते हैं। मान्यता के अनुसार शिला मां के दर्शन तभी सफल होते हैं, जब भक्त भैरव दर्शन करके लौटते हैं। इसका कारण है कि भैरव का वध करने पर उसने अन्तिम इच्छा में देवी मां से यह वरदान मांगा था कि आपके दर्शनों के उपरान्त मेरे दर्शन भी भक्त करें ताकि देवी मां के नाम के साथ भैरव का नाम भी लोग याद रखें और देवी मां ने भैरव की इस इच्छा को पूर्ण कर उसे यह आर्शीवाद प्रदान किया था।

इस बार हाथी की सवारी बंद

पर्यटकों के लिए आमेर महल के में भ्रमण एक रोमांच हाथी की सवारी का भी होता है लेकिन भीड़ का प्रबन्ध सही हो ऐसे में हाथी की सवारी को 24 अक्टूबर तक के लिए बंद कर दिया है। इसके अलावा महल में नाइट टूरिज्म भी नहीं रहेगा। महल सुबह 8 से शाम 05:30 तक पर्यटकों के लिए खुला रहेगा। आमेर महल में पर्यटकों के प्रवेश के लिए टिकट बुकिंग व्यवस्था सिंहपोल गेट पर की गई है। महल के त्रिपोलिया गेट से पर्यटकों की निकासी की व्यवस्था की गयी है।

Advertisement

Advertisement
Tags :
Advertisement