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सिंगलु-मिंगलु - 21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां हिमाचल प्रदेश

07:00 PM Jul 07, 2024 IST | Reena Yadav
सिंगलु मिंगलु   21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां हिमाचल प्रदेश
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भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

अमन, उसकी छोटी बहन, मां और पिता सब अपनी दादी के घर आ गए थे। कोरोना महामारी के चलते पिता की नौकरी छूट गई थी। अमन के पिता ने अब फैसला किया कि वह गांव में ही रहकर खेती-बाड़ी करेंगे। धीरे-धीरे अमन का मन भी गांव में लगने लगा था।

गांव में हालांकि अब शहरी तौर तरीके पहुंच चुके थे। लेकिन उसके पिता की दिली इच्छा थी कि वह अमन को अपने जमाने की कुछ आदतों से परिचय करवाएं। अमन और आयुषी हर रोज सुबह-सवेरे पिता के साथ खेतों का दौरा करने जाते और वहां पर तिरमिरे की ताजा दातुन करते। वापसी में गांव की बावड़ी में हाथ मुंह धोकर ही घर लौटते।

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इस बार अमन ने अपने पिता और दो मजदूरों के साथ मक्की बिजाई का सारा काम किया था। अमन को इस सब में बहुत आनंद आया। हालांकि वह थक भी काफी जाता था लेकिन वह फिर कार्य में रम जाता। अपनी क्यारी से निकले धनिये को जब मां दाल में डालती थी तो उसकी खुशबू से उसकी और आयुषी की भूख और बढ़ जाती थी। लोकल काकड़ी के स्वाद के तो क्या कहने! पिता अक्सर दोनों भाई-बहनों को नारियल गरी के टुकड़े खाने को देते और कहते कि ये उनके जमाने के बिस्कुट हैं।

एक दिन मक्की के खेत में अमन ने दो चूहे देखे। वे भूरे रंग के थे। उसने देखा वे मेड़ के नीचे बने हुए बिल में से आ जा रहे थे। दोनों बहुत प्यारे लगे अमन को। उसने उनका नाम सिंगलु और मिंगलु रख दिया। उसे मालूम ही नहीं चला कि दोनों की हरकतें देखते-देखते कब काफी समय बीत गया। अब घर जाने का वक्त हो गया था। अमन पिता के रोज की तरह बातें करते हुए चल रहा था। लेकिन उसका ध्यान तो सिंगलु और मिंगलु में ही रह गया था।

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अगले दिन खेत जाते हुए अमन अपनी जेब में चुपके से एक चपाती और गरी का टुकड़ा ले गया। खेत पहुंचते ही झट से वह सिंगलु-मिंगलु के बिल के पास गया और चपाती तथा गरी का टुकड़ा वहां रख दिया। सिंगलु और मिंगलु फुदकते हुए आते हैं और धीरे से छोटा-सा हिस्सा कुतर कर बिल में चले जाते हैं। अमन अब रोज उनसे मिलने आता। धीरे-धीरे वे दोनों जैसे अमन के दोस्त बन गए। अमन ने आयुषी को यह बताया तो वह भी रोज अमन के साथ खेत आने लगी। उसे पहले खेत में काम करना अच्छा नहीं लगता था। लेकिन सिंगलु मिंगलु के कारण अब वह भी रुचि लेने लगी थी। मक्की की गुड़ाई के लिए अब दो हाथ और मिल गए थे।

वक्त बीतता गया, मक्की बढ़ती गयी और अब भुट्टे लग गए थे। खेत में ही आग जलाकर भुट्टे भूनकर खाने का मजा ही अलग था। अमन और आयुषी अब शहर को भूलने लगे थे। मेहनत का फल बढ़िया निकला था। खूब फसल हुई थी।

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आज पांच मजदूर बुलाए गए ताकि सारी मक्की का एक ही बार तुड़ान कर लिया जाए। जैसे ही तुड़ान शुरू हुआ, एक मजदूर जिसका नाम मदन था उसका पांव सिंगलु-मिंगलु के बिल में घुस गया। वह पांव बाहर निकालने की कोशिश कर रहा था। लेकिन वह घुटने तक अंदर चला गया। वह जोर से चिल्लाया। सब भागे-भागे आए उसकी सहायता के लिए। खींचने से पांव निकल नहीं रहा था इसलिए फावड़े से आस-पास की मिट्टी निकालने का फैसला लिया गया।

अमन और आयुषी को सिंगलु मिंगलु की चिंता सता रही थी। दोनों ने समझाने की कोशिश की कि फावड़ा न इस्तेमाल करें। इससे बिल में बैठे उनके दोस्तों को नुकसान हो सकता है। लेकिन उनकी बात हंसी में अनसुनी कर दी गई। सब कह रहे थे इन दोनों को ये चिंता नहीं हो रही कि कहीं फावड़े से मदन को न लग जाए। उन्हें चूहों की चिंता हो रही है। चूहे इंसान के दोस्त कैसे हो सकते हैं?

खैर, धीरे-धीरे फावड़े से मिट्टी निकालना शुरू की गई। लेकिन यह क्या अंदर से तो भुट्टे निकल रहे थे। कुछ कुतरे हुए, कुछ साबुत। मिट्टी के साथ लगभग बीस भुट्टे निकले बिल से और तब जाकर मदन की टांग, पैर सहित बाहर आ पाई। सबको दुःख हो रहा था कि चूहों ने इतनी मक्की बर्बाद कर दी।

सब लोग दोबारा मक्की तुड़ान में लग चुके थे। अमन और आयुषी को रह-रहकर सिंगलु-मिंगलु की याद सता रही थी। उनका मन नहीं लग रहा था।

शाम को घर जाने से पहले दोनों बहन-भाई सिंगलु-मिंगलु के गिर चुके बिल के पास अनमने से चले गए एक चक्कर मारने। कुतर-कुतर की आवाज आती सुनाई दी तो मक्की के डंठल के नीचे सिंगलु-मिंगलु दिखाई पड़े। दोनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। हालांकि उन्हें अपने दोस्तों के घर टूटने का दु:ख हो रहा था। लेकिन उन्हें जिंदा देखकर उससे कहीं ज्यादा खुशी।

मक्की की बम्पर फसल निकली थी। इसलिए पिता भी काफी खुश थे। बीस भुट्ट बर्बाद होने का कोई मलाल नहीं था। मजदूरों को भी अच्छी दिहाड़ी के साथ-साथ पचास रुपये इनाम में दिए गए।

घर पहुंचते ही मां ने बताया कि अगले सप्ताह से गांव के स्कूल की ऑनलाइन कक्षाएं शुरू हो रही हैं। इसलिए अब अपनी किताब, कॉपियां दुरुस्त कर लें। रात के भोजन के बाद, अमन और आयुषी ने दिन की सारी दास्तान दादी को सुनाई। दादी ने दोनों को बताया कि धरती सब जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों की भी उतनी ही है जितनी इंसानों की। प्रकृति में संतुलित सह-अस्तित्व ही इंसान का अस्तित्व है।

अगली सुबह जब अमन और आयुषी अपने पिता के साथ खेत में गए तो देखा कि बहुत सारी चिड़ियां खेत में गिरे हुए मक्की के दाने चुग रही थीं। वे बहुत सुंदर लग रहीं थीं। सिंगलु-मिंगलु आज खेत में मेड़ के नीचे नहीं दिखे। शायद वे अब कहीं और नया बिल बनाने जा चुके थे।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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