For the best experience, open
https://m.grehlakshmi.com
on your mobile browser.

स्ट्राइक - 21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां हिमाचल प्रदेश

07:00 PM Jun 26, 2024 IST | Reena Yadav
स्ट्राइक   21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां हिमाचल प्रदेश
strike
Advertisement

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

पशु-पक्षी तड़प-तड़प कर मर रहे थे। इंसानों को अजीब तरह की बीमारियां होने लगी थीं। सांस लेने में कठिनाई आ रही थी। पहले बीमार व्यक्तियों की मृत्यु दर में भारी उछाल आ गया था। डॉक्टरों को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था।

बच्चे, नौजवान, युवा सब बराबर बीमार होने लगे थे। कार्बन डाईऑक्साइड का बढ़ता स्तर और ऑक्सीजन की कमी से लोग मरने लगे थे। बस इतनी बात डॉक्टर्स को समझ आ रही थी। सरकार ने स्कूल, कॉलेज और अन्य सभी शिक्षण संस्थान, सरकारी कार्यालय भी बंद करने के आदेश दे दिए। लोगों से कहा गया कि अपनो के साथ रहें और एक-दूसरे का ध्यान रखें। सभी परेशान थे लेकिन परेशानी का सबब समझ से परे था।

Advertisement

गांव के बच्चे पाठशाला में छुट्टी होने के कारण जंगल में लड़की लेने गए। उनकी नजर पड़ी कि कुछ पेड़-पौधे एक-दूसरे पर जैसे गिरे पड़े हैं। उन्होंने इधर-उधर नजर घुमाई तो इसी तरह के कुछ और भी पेड़ों के झुण्ड बने थे। बच्चों ने घर आकर ये बात अपने मम्मी-पापा से कही। उन्होंने साथ लगते जंगल में देखा। सच में पेड़ एक-दूसरे की ओर हल्के झुके हुए थे। कुछ लोगों ने अपने मोबाइल से विडियो बनाए और सोशल मीडिया पर शेयर कर दिए। कुछ ही पलों में वीडियो वायरल हो गए। जिन्होंने विडियो देखे उन्होंने भी जंगल में जाकर देखा तो वहां भी ऐसा ही था। कुछ ही मिनटों में देशभर में इसी तरह के लाखों वीडियो सोशल मीडिया पर तो अपलोड़ हुए ही, टी.वी. चैनल पर भी ये आने लगा। कहीं पेड़ कम, कहीं अधिक झुके हुए थे। उनके पास जाओ कोई हवा नहीं। कोई हरकत नहीं, आवाज नहीं, एकदम शांत, सुनसान, एक अजीब तरह की मरघटी शान्ति व्याप्त थी। सरकार हरकत में आई और वैज्ञानिकों को जांच के लिए भेजा गया। वैज्ञानिकों को बच्चों की बात में दम लगा और वे इसी दिशा में आगे बढ़े। अलग-अलग स्थानों से पेड़-पौधों के नमूने एकत्र किये। उन्हें लैब में जाकर जांचा-परखा गया। जब तक रिपोर्ट आई तब तक सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद हजारों की संख्या में लोग काल के मुंह में समा गए थे। मरने वालों में अधिकतर बूढ़े, बीमार और बच्चे थे। चारों ओर हाहाकार मची हुई थी। रिपोर्ट से ज्ञात हुआ कि पेड़-पौधों ने ऑक्सीजन बनाना बंद कर दिया है।

पेड़ों के पत्ते भी सूखने लगे थे। पीले पड़ चुके पत्ते झड़ रहे थे। अब यह मालूम कैसे हो कि वृक्षों ने काम करना क्यों बंद कर दिया है? इसलिए अनुसंधान जारी था। लेकिन तब तक लोगों की जान कैसे बचाई जाए? लोग दम घुटने से मर रहे थे। लोगों की जान बचाने के लिए उन्हें वेंटीलेटर पर रखा जाने लगा था। लेकिन मरीजों की दर जिस तरह से बढ़ रही थी उस दर से वेंटीलेटर बनाना भी संभव नहीं था।

Advertisement

बुजुर्ग लोग बता रहे थे कि ऐसी ही वबा कुछ दशक पहले भी आई थी। जिसने न केवल हमारे देश को बल्कि पूरी दुनिया को ही अपनी चपेट में ले लिया था। असंख्य लोग मारे गए थे। लोग अपने ही परिवार के सदस्यों से डरने लगे थे। उन्हें छूने से बीमार होने का खतरा था। इसलिए लोग मरीज से दूर रहते थे। उस वबा का नाम कोविड-19 बताया गया था। अब फिर उसी तरह लेकिन अलग तरह की इस आफत ने सब को दहशत में डाल दिया था।

वैज्ञानिक अनुसंधान करते हुए थक चुके थे। कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। अचानक उन्हीं बच्चों के मन में यह बात आई। पलक ने कहा, “बिटू अंकल, पेड़-पौधे कहीं स्ट्राइक पर तो नहीं चले गए?”

Advertisement

“अरे हां, सही है। ऐसा ही होगा। वरना, भले-चंगे ये वृक्ष काम करना क्यों छोड़ते।”

यह बात पलक से बुलवाकर सोशल मीडिया पर डाली गई तो कुछ ही पल में वायरल हो गई। कुछ ही घंटों में उन वैज्ञानिकों तक भी ये बात पहुंच गई जो इस पर खोज कर रहे थे। उन्हें कुछ और तो सूझ नहीं रहा था। वे तुरंत वृक्षों के पास गए और उनके अलग-अलग भागों से कुछ और नमूने लिए। उस पर खोज कर यह मालूम हो गया की हां वे स्ट्राइक पर ही हैं। यह भी मालूम हो गया कि वृक्ष इसलिए स्ट्राइक पर हैं कि उन्हें काटा जा रहा है। उनकी संख्या बहुत कम रह गई है। उन्हें सताया जा रहा है। ये सारे काम मनुष्य कर रहा है। अतः उन्होंने मनुष्य को सबक सिखाने के उद्देश्य से स्ट्राइक की है। हालांकि इस में उनके भी बहुत से पेड़ भोजन के बिना शहीद हो गए थे। क्योंकि जब पेड़ पौधे कार्बन डाईऑक्साइड नहीं ले रहे हैं तो वे अपना भोजन नहीं बना रहे हैं। इसीलिए ऑक्सीजन नहीं छोड़ रहे हैं।

अब समस्या ये खड़ी हुई कि यह संदेश उन तक कैसे पहुंचे कि हम आप सबको तंग नहीं करेंगे। सताएंगे नहीं। काटेंगे भी नहीं, जब तक कोई वृक्ष सूख नहीं जाएगा।

बड़े-बड़े माइक लगाकर हर तरह से यह बात वृक्षों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। आखिर में हारकर वैज्ञानिकों को संदेश और पलक का ध्यान आया। उन्होंने तुरंत उनसे संपर्क साधा और इसका भी समाधान खोजने के लिए कहा।

दोनों बच्चों ने कहा हम सब बच्चे पेड़-पौधों के पास जाकर सॉरी कहेंगे। देशभर के बच्चों को एक ही समय में इकट्ठा किया जाए और सबसे प्रार्थना करवाई जाए कि हम लोगों के लिए प्लीज स्ट्राइक छोड़ दीजिए। हम लोग मर जाएंगे। हम लोगों के माता-पिता, दादा-दादी जिसने भी जो भी गलतियां की हैं। उन सब को भूलकर हमारे लिए प्लीज ये स्ट्राइक छोड़ दो।

देशभर के बच्चों ने रोते हुए पेड़-पौधों से लिपट कर यह अपील की। सॉरी कहा और उनके आगे हाथ जोड़े। बच्चों की इस अश्रुपूरित प्रार्थना का असर हुआ और कुछ ही क्षणों में पेड़-पौधे सीधे होने लगे। ऑक्सीजन फिर से प्रवाहित होने लगी और लोग जिन्दगी की सांस लेने लगे। बच्चे भी खुशी से झूम उठे और पेड़ों को पकड़ कर चूमने लगे।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

Advertisement
Advertisement