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तकरार - कहानियां जो राह दिखाएं

09:00 PM Jun 22, 2024 IST | Reena Yadav
तकरार   कहानियां जो राह दिखाएं
takaraar
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Hindi Story: अमन टाइम पास करने के लिये इंटरनेट पर इधर-उधर उंगलियां चला रहा था कि अचानक उसके फोन की घंटी बज उठी। अमन ने अपना ध्यान कंप्यूटर से हटा कर फोन पर किया तो किसी अनजान-सी लड़की की आवाज सुनाई दी-हैलो जान, क्या हाल है? अमन ने भी इतनी मीठी और मधुर आवाज सुनकर कह दिया-‘हां, बोलो बेबी, तुम कैसी हो?’ लड़की ने फिर से एक सवाल कर दिया कि इतने दिनों से कहां हो, कुछ अता-पता ही नहीं तुम्हारा।

अमन ने भी बिना यह जाने कि किस का फोन है कह दिया- ‘अरे, मैं तो तुम्हारी ही यादों में खोया हुआ था।’ ‘अच्छा अभी क्या कर रहे हो?’ लड़की ने अगला सवाल कर डाला। अमन ने बिना यह पूछे कि कौन बोल रहा है, कह दिया कि मेरा तो मन ही नहीं लग रहा, मैं तो इस समय भी तुम्हारी ही तस्वीर देख रहा हूं। लड़की ने कहा कि कमाल करते हो, मैंने तो तुम्हें आज तक तुम्हें अपनी कोई तस्वीर दी ही नहीं। हाजिरजवाब अमन ने कहा कि तुमने अपनी तस्वीर मुझे नहीं दी, लेकिन तुम्हारी तस्वीर तो बरसों से मेरे दिल में बसी हुई है। लड़की ने कहा कि यह तुम क्या कह रहे हो? अभी 3-4 दिन पहले ही तो हम मिले थे, यह बरसों की बात कहां से आ गई। अमन ने अपनी आशिकी झाड़ते हुए कहा कि तुम्हारे बिना एक पल भी बरसों के समान लगता है पूजा। अब फोन पर दूसरी ओर से कड़कती आवाज आई, ‘यह पूजा कौन है, मैं तो रेखा बोल रही हूं।’ अमन ने इस मस्ती को और आगे बढ़ाते हुए कहा- ‘देखा तुमसे बात करते ही मैं सब कुछ भूल जाता हूं।’ रेखा को लगा कि कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ जरूर है। उसने बात साफ करते हुए कहा कि तुम राहुल ही बोल रहे हो न। अमन ने कहा कि घर वाले तो मुझे अमन कहते हैं, लेकिन वो सब गलत कहते हैं, तुम्हारे लिये मैं राहुल ही हूं।

लड़की ने जब फोन का नंबर पूछा तो अमन ने कहा कि आज तक तो यह नंबर मेरा नहीं था, लेकिन आज से तुम्हारा फोन नंबर मेरा हो गया है। एक गलत फोन के मिलने से शुरू हुई तकरार कब प्यार में बदल गई, यह न तो अमन और न ही रेखा को पता चला।

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जब कभी मौका मिलता नटखट अमन रेखा से शरारत करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ता था। एक दिन दोनों बाग में सैर कर रहे थे। अमन ने रेखा से कहा कि आज मैं तुम से कुछ कहना चाहता हूं, जिससे तुम्हारे दिल की धड़कन तेज हो जायेगी और तुम्हें कुछ-कुछ होने लगेगा। रेखा ने कहा-‘बोलो क्या कहना चाहते हो?’ अमन ने कहा-‘भाग जल्दी से तेरे पापा आ रहे हैं।’ एक बार तो रेखा भी घबरा गई, लेकिन जब उसने मुड़कर पीछे देखा तो कोई भी नहीं था। इसी नटखट प्यार ने दोनों को इतना करीब ला दिया कि जल्द ही एक दिन शहनाई बजी, हाथ पीले हुए और दोनों शादी के बंधन में बंध कर एक हो गये। शादी के कुछ दिन बाद रेखा ने अमन से शिकायत की-‘तुम रोज सुबह-सुबह मेरे चेहरे पर पानी क्यूं डालते हो?’ अमन ने कहा- ‘शादी वाले दिन तुम्हारी मां ने कहा था कि मेरी बेटी फूलों की तरह है, इसे कभी भी मुरझाने मत देना। बस उन्हीं के हुक्म को मानते हुए मैं तुम्हारी यह सेवा करता हूं।’

अमन के साथ रहते हुए रेखा को भी हर समय थोड़ी मस्ती और तकरार करने की आदत-सी हो गई। शादी के कुछ दिनों बाद जब करवाचौथ का व्रत आया तो अमन की मम्मी ने अपनी बहू रेखा को आशीर्वाद देते हुए कहा - ’सदा सुहागन रहो’। रेखा ने इस बात का उल्टा मतलब निकालते हुए सासू मां से कहा कि आप यह कैसा आशीर्वाद दे रही है, आपके कहने का तो यही मतलब हुआ कि आपके बेटे से पहले मैं मर जाऊं। बहू की यह प्रतिक्रिया देख कर अमन की मां ने आगबबूला होने की बजाए बहू को प्यार से कहा कि मैं अच्छे से जानती हूं कि खरबूजे को देख खरबूजा रंग बदलता है। बेटी इसमें तुम्हारा कोई कसूर नहीं, तुम्हें भी मेरे बेटे अमन की तरह जमाने की हवा लग गई है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि आप लोग अपनी इस नोक-झोंक या तकरार से घर की खुशियों में ही आग लगानी शुरू कर दो। रेखा जैसे ही कुछ कहने लगी तो उसकी सासू मां ने कहा कि न तो मैं कोई गड़े मुरदे उखाड़ने में विश्वास रखती हूं और न ही मुझे अगर-मगर करना आता है। अब आप बच्चे नहीं रहे, अब तुम्हारी शादी हो चुकी है और तुम लोग एक नये जीवन की शुरुआत कर चुके हो। इसके लिये मैं तो सिर्फ इतना ही समझाना चाहती हूं कि हम जैसे कर्म करते हैं वैसा ही हमारा जीवन और भाग्य बन जाता है। हमें जो भी फल मिलता है वो हमारे भाग्य का नहीं बल्कि हमारे अपने कर्मों का ही होता है। हमारे आसपास कई प्रकार के हालात होते हैं। लेकिन यह हमारी सोच पर निर्भर करता है कि हम उन्हें कैसे देखते हैं। यदि हमें अपने ऊपर पूर्ण विश्वास होता है तो हर प्रकार के हालात अच्छे लगने लगते हैं। जैसी जिसकी सोच होती है वैसी ही उसकी दृष्टि बन जाती है। इसलिये सदा अपनी सोच वैसी ही रखे जो कुछ आप चाहते हैं।

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सासू मां ने अपनी बहू रेखा का एक बेटी की तरह मार्गदर्शन करते हुए उससे कहा कि जीवन में किसी को हराना कोई मुश्किल काम नहीं है, किसी को जीतना बहुत मुश्किल होता है। जवानी के इस जोष में हर आदमी में बेहिसाब ऊर्जा होती है और यह लगातार प्रवाहित होती रहती है। अब यदि इसे सृजनात्मक कार्यो में न लगाया जाये तो यह नकारात्मक काम करने लगती है, जो हमारे साथ दूसरों के लिये भी हानिकारक हो सकता है। सारी दुनिया जानती है कि रावण इस बात का जीता-जागता उदाहरण है। यह सब सुनते ही रेखा ने कहा कि आपके कहने का मतलब तो यह हुआ कि हमें हर समय कोई हंसी-मजाक नहीं, केवल प्यार और शहद से भरी मीठी-मीठी बातें ही करनी चाहिये।

इससे पहले की बहू आगे कुछ कहती सासू मां ने उससे कहा कि यहां भी तुम गलत बात कह रही हो, क्योंकि जिन रिश्तों में जरूरत से अधिक मिठास होती है वहां बहुत जल्द ही कड़वापन आ जाता है। एक बात सदा अपने पल्ले बांध कर रखना कि यदि हर कोई सच्चे मन से अपने प्रियजनों द्वारा हुई जाने-अनजाने में प्यार और तकरार की घटनाओं को माफ कर देता है तो समाज से सभी प्रकार के मनमुटाव खत्म हो सकते हैं। सासू मां के प्रेरणाप्रद विचारों को सुनकर जौली अंकल भी अब इस बात से इंकार नहीं कर सकते कि बात बिगाड़ने में कुछ वक्त नहीं लगता जबकि बात जमाने में जमाना बीत जाता है। इसलिये हर रिश्ते को घड़ी की सूईयों की तरह निभाना चाहिये जो चाहे मिले तो कभी-कभी है, लेकिन रहती हमेशा एक साथ है फिर चाहे उनमें थोड़ी-बहुत तकरार चलती ही रहे। नजरिया एक छोटी-सी चीज होती है परंतु यह फर्क बहुत बड़ा डाल सकती है।

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