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बेटियों के विवाह की नहीं है चिंता, सरकार कर रही जरूरमंदों की मदद, जानिए योजना

आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए बिटियों के हाथ पीला करना भी एक चुनौती है। लेकिन जरूरतमंदों की मदद के लिए कई राज्यों की सरकारें आगे आई हैं। उन्होंने बेटियों के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं
08:00 PM Apr 25, 2023 IST | Ankita Sharma
बेटियों के विवाह की नहीं है चिंता  सरकार कर रही जरूरमंदों की मदद  जानिए योजना
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बेटी के जन्म के साथ ही माता-पिता उसकी शादी के अरमान संजोना शुरू कर देते हैं। इस खास दिन के लिए पाई-पाई जोड़ना शुरू कर देते हैं। हालांकि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए बिटियों के हाथ पीला करना भी एक चुनौती है। लेकिन जरूरतमंदों की मदद के लिए कई राज्यों की सरकारें आगे आई हैं। उन्होंने बेटियों के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जिससे शादी के समय उनकी और उनके परिवार की मदद हो सके।

मध्य प्रदेश: बिटिया के हाथ पीले करने में मदद करेगी सरकार 

मध्य प्रदेश के सामाजिक न्याय एवं निशक्‍तजन कल्‍याण विभाग ने प्रदेश के गरीब और कमजोर परिवारों की मदद के लिए मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना शुरू की है। साल 2006 में दीनदयाल अंत्योदय मिशन के तहत शुरू की गई इस योजना के तहत निराश्रित, निर्धन कन्या/विधवा/तलाकशुदा बेटियों के सामूहिक विवाह/निकाह के लिए आर्थिक मदद दी जाती है। इस योजना की पात्र कन्याओं का मध्य प्रदेश की मूल निवासी होना जरूरी है। साथ ही लाभार्थी कन्या की उम्र 18 वर्ष और जिस युवक से शादी हो रही है उसकी उम्र 21 पूरी होनी चाहिए। योजना के तहत सरकार की ओर से कुल 51 हजार रुपए की मदद दी जाती है। इनमें से 48 हजार रुपए कन्याओं के खाते में जमा कराए जाते हैं। वहीं शेष तीन हजार रुपए सामूहिक विवाह/निकाह कार्यक्रम कराने वाले निकाय, जनपद पंचायत को दिए जाते हैं।

ऐसे उठा सकते हैं लाभ : योजना का लाभ लेने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को आवेदन पत्र क्षेत्र की ग्राम पंचायत या जनपद पंचायत में आवश्यक दस्तावेजों के साथ जमा करवाना होता है। वहीं शहरी क्षेत्रों के आवेदक अपना आवेदन पत्र नगर निगम, नगर पालिका या फिर नगर परिषद के कार्यालय में जरूरी दस्तावेजों के साथ जमा करवा सकते हैं।

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उत्तर प्रदेश: विवाह अनुदान योजना बनी सहारा  

उत्तर प्रदेश में बेटियों की शादी के लिए विवाह अनुदान योजना चलाई जा रही है। योजना के अंतर्गत लाभार्थी को बेटी की शादी के लिए एक निश्चित धनराशि राज्य सरकार की ओर से दी जाती है। इस योजना की शुरुआत साल 2016-17 में की गई थी। योजना के तहत गरीब परिवार की बेटियों की शादी के लिए आर्थिक मदद दी जाती है। योजना का लाभ ले रही कन्या की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष और उससे विवाह कर रहे लड़के की उम्र न्यूनतम 21 साल होना अनिवार्य है। जिन ग्रामीण परिवारों की आय 46,080 रुपए प्रतिवर्ष तक है, वे इस योजना के पात्र हैं। वहीं जिन शहरी परिवारों की आय 56,460 रुपए प्रतिवर्ष तक हैं, वे भी इसका लाभ उठा सकते हैं। हालांकि योजना का लाभ सिर्फ दो ही बेटियों की शादी के लिए उठाया जा सकता है।

ऐसे उठा सकते हैं लाभ : आवेदक का उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होना अनिवार्य है। इस योजना का लाभ पाने के लिए नेशनल बैंक में खाता होना जरूरी है। इस खाते को खोले हुए कम से कम तीन माह होने चाहिए। आवेदक को सरकार की तरफ से 51 हजार रुपए की आर्थिक मदद दी जाती है। योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक योजना की आधिकारिक वेबसाइट shadianudan.upsdc.gov.in पर रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। इसमें कई तरह के आवश्यक दस्तावेज मांगे जाते हैं, जिन्हें आप फॉर्म में ही अपलोड कर सकते हैं।

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राजस्थान: मुख्यमंत्री कन्यादान योजना का बड़ा लाभ 

राजस्थान सरकार ने प्रदेश की बेटियों के लिए मुख्यमंत्री कन्यादान योजना शुरू की। इस योजना के तहत उन बेटियों को विवाह के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है, जिनके परिवार में कोई कमाने वाला नहीं है या फिर जिनकी वार्षिक आय पचास हजार रुपए तक है। योजना के माध्यम से बीपीएल परिवार, अंत्योदय परिवार, आस्था कार्डधारी परिवार की बेटियों तथा आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्ग की कन्या को विवाह के लिए 31 हजार से लेकर 51 हजार रुपए तक की आर्थिक सहायता दी जाती है। साथ ही, वे महिलाएं जिनके पति की मृत्यु हो गई है एवं उन्होंने पुनर्विवाह नहीं किया है, ऐसी महिलाओं की पुत्रियां इस योजना का लाभ प्राप्त करने की पात्र हैं। प्रत्येक परिवार की केवल दो बेटियां ही इस योजना के तहत लाभ प्राप्त कर सकती हैं।

ऐसे उठा सकते हैं लाभ : योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए कन्या की आयु 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। योजना का लाभ सभी को मिले, इसके लिए प्रत्येक जिले में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में मॉनिटरिंग समिति गठित की गई है। योजना के लिए आवेदन विवाह की तिथि से एक माह पूर्व या फिर विवाह की तिथि के 6 माह बाद जिलाधिकारी को प्रस्तुत करना होता है। आवेदन का निराकरण अधिकतम 15 दिवस की अवधि में किया जाता है। लाभ की राशि सीधे आवेदक के खाते में आती है।

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