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हिन्दू धर्म में नहीं की जाती है इन देवताओं की पूजा, जानें कारण: Hindu Belief

06:30 AM Jul 04, 2024 IST | Ayushi Jain
हिन्दू धर्म में नहीं की जाती है इन देवताओं की पूजा  जानें कारण  hindu belief
Hindu Belief
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Hindu Belief: हिंदू धर्म शास्त्रों और देवी-देवताओं के विशाल संसार में, हर देवता की एक अलग महिमा है। प्रत्येक देवता को समर्पित पूजा-विधान और स्थापना के नियमों का भी विस्तृत वर्णन मिलता है। लेकिन ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स बताते हैं कि कुछ देवता ऐसे भी हैं जिनकी पूजा वर्जित मानी जाती है। न सिर्फ इनकी मूर्तियां घर में स्थापित नहीं की जातीं, बल्कि सनातन परंपरा में इनकी आराधना का कोई विधान भी नहीं मिलता। आइए जानते हैं इस अनोखे पहलू के पीछे के कारणों को।

शास्त्रों में वर्जित इन देवताओं की पूजा से जुड़े कई मत हैं। कुछ का मानना है कि इन देवताओं का स्वभाव क्रूर होता है और उनकी आराधना से नकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सकता है, जिससे जीवन में बाधाएं आ सकती हैं। अन्य मतों के अनुसार, ये देवता असुरों से जुड़े हुए हैं, जिन्हें हिंदू धर्म में अक्सर नकारात्मक शक्तियों के रूप में देखा जाता है। ऐसे में इनकी पूजा करना उचित नहीं माना जाता। कुछ ग्रंथों में यह भी उल्लेख मिलता है कि इनमें से कुछ देवताओं को श्राप मिला हुआ है। इन्हें पूजने से श्राप का असर हमारे ऊपर भी पड़ सकता है। वहीं, कुछ देवताओं की पूजा विधि ही अस्पष्ट या विवादित मानी जाती है, जिससे पूर्ण विधान के साथ उनकी आराधना संभव नहीं हो पाती।

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इंद्रदेव की पूजा क्यों नहीं होती?

हिंदू धर्म में देवताओं का एक विशाल समूह है, जिनमें से प्रत्येक की अपनी महिमा और शक्तियां हैं। इन देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की विधियां भी शास्त्रों में विस्तार से बताई गई हैं। लेकिन एक नाम है जो इस धार्मिक पूजा-पद्धति से थोड़ा अलग है - इंद्रदेव। कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि इंद्रदेव की पूजा क्यों नहीं होती? इसका उत्तर जानने के लिए हमें थोड़ा गहराई में जाना होगा। इंद्र शब्द का अर्थ है देवताओं का राजा। यह कोई एकल देवता का नाम नहीं है, बल्कि यह एक उपाधि है जो देवलोक के शासक को दी जाती है। जैसे-जैसे समय बदलता है और देवताओं के बीच शक्ति का संतुलन बदलता है, इंद्र की पदवी भी एक देवता से दूसरे देवता को हस्तांतरित होती रहती है। इसी कारण से इंद्र की पूजा किसी विशेष देवता के रूप में नहीं की जाती। पूजा की जाती है उस पद की, जो देवताओं के नेतृत्व और न्याय का प्रतीक है।

ब्रह्मा जी की पूजा क्यों नहीं होती?

ब्रह्मा जी, हिंदू धर्म में सृष्टि के रचयिता के रूप में विख्यात हैं। उनके चार मुखों से वेदों का उद्भव हुआ और उन्हीं के कमलों से ब्रह्मांड का जन्म माना जाता है। विष्णु जी जहां सृष्टि का पालन करते हैं और शिव संहार करते हैं, वहीं ब्रह्मा सृजन के देवता हैं। फिर भी, मंदिरों में उनकी भव्य प्रतिमाओं और विधिपूर्वक पूजा-अर्चना का न होना एक रहस्य है। आइए जानते हैं ब्रह्मा जी की पूजा ना होने के पीछे छिपे रहस्यमय किस्सों को। पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक कथा ब्रह्मा जी के अपमान और श्राप से जुड़ी है। यज्ञ के दौरान, अपनी पत्नी सरस्वती जी की प्रतीक्षा किए बिना ही उन्होंने किसी अन्य स्त्री को पत्नी के आसन पर बैठा दिया। इससे क्रोधित होकर माता सरस्वती ने उन्हें श्राप दिया कि सृष्टि में उनकी पूजा नहीं होगी।

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यमराज की पूजा क्यों नहीं होती?

यमराज की पूजा ना होने के पीछे शास्त्रों में एक तर्क दिया गया है। शास्त्रों के अनुसार, जब हम किसी देवता की पूजा करते हैं तो हमें उनके दर्शन होते हैं या उनकी उपस्थिति का अनुभव होता है। यमराज मृत्यु के देवता हैं, और यदि उनकी पूजा की जाए तो वे भक्ति के बदले मृत्यु ही दे सकते हैं। क्योंकि मृत्यु ही उनके अधीन है। इसलिए, यमराज की पूजा वर्जित मानी जाती है। इसके बजाय, मृत्यु के प्रति जागरूकता और श्रद्धा का भाव रखना ज़रूरी है। यह स्वीकार करना ज़रूरी है कि मृत्यु जीवन का एक स्वाभाविक पहलू है, और हमें इसका डर नहीं, सम्मान करना चाहिए।

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