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तुला राशिफल – Tula Rashifal 2024 – 24 June To 30 June

12:00 AM Jun 22, 2024 IST | Reena Yadav
तुला राशिफल – tula rashifal 2024 – 24 june to 30 june
libra horoscope 2024
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रा, री चित्रा‒2

रु, रे, रो, ता स्वाति‒3

ती, तू, ते विशाखा‒3

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24 जून से 30 जून तक

दिनांक 24, 25 को आपका जोश, जुनून सारा ठंडा पड़ जाएगा। स्वास्थ्य संबंधी सावधानी बरतें। बेसमय खाया गया भोजन या बाहरी खानपान एसीडीटी का कारण बनेगा। आप में संयम या धैर्य का अभाव रहेगा। 26, 27 को सामान्य कार्यगति रहेगी। मन में चल रहे सारे ऊहापोह समाप्त हो जाएंगे। मित्र परिजन मददगार साबित होंगे। धन प्राप्ति की दिशा में चल रहे सारे प्रयास सफल होंगे। 28, 29 को समय बहुत अच्छा है। आप खूब काम करेंगे। दिन अच्छा व्यतीत होगा। मनोवांछित इच्छा की पूर्ति होगी। लोगों से मेलजोल बढ़ेगा। 30 को अप्रत्याशित काम करेंगे। मौसम के अनुरूप कार्य करेंगे। व्यवसाय में कड़ी चुनौती मिलेगी। मन प्रसन्न रहेगा।

ग्रह स्थिति

मासारम्भ में शनि कुंभ राशि का पंचम भाव में, मंगल+चंद्रमा+राहु मीन राशि का षष्टम भाव में, सूर्य+ बुध+गुरु+शुक्र वृषभ राशि का अष्टम भाव में, केतु कन्या राशि का बारहवें भाव में चलायमान रहेंगे।

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तुला राशि की शुभ-अशुभ तारीख़ें

2024शुभ तारीख़ेंसावधानी रखने योग्य अशुभ तारीख़ें
जनवरी1, 5, 6, 7, 10, 11, 27, 28, 293, 4, 12, 13, 20, 21, 22, 30,31
फरवरी2, 3, 6, 7, 23, 24, 25, 298, 9, 10, 16, 17, 18, 26, 27, 28
मार्च1, 4, 5, 22, 23, 27, 28, 297, 8, 15, 16, 25, 26
अप्रैल1, 2, 18, 19, 20, 24, 25, 28, 293, 4, 11, 12, 13, 21, 22
मई15, 16, 17, 21, 22, 25, 261, 2, 8, 9, 10, 18, 19, 28, 29
जून12, 13, 17, 18, 19, 21, 22, 235, 6, 15, 16, 24, 25
जुलाई9, 10, 14, 15, 16, 19, 202, 3, 4, 12, 13, 21, 22, 23, 29, 30, 31
अगस्त5, 6, 7, 11, 12, 15, 168, 9, 18, 19, 26, 27
सितम्बर2, 3, 7, 8, 9, 11, 12, 13, 29, 304, 5, 6, 14, 15, 22, 23, 24
अक्टूबर4, 5, 6, 9, 10, 26, 27, 282, 3, 12, 13, 19, 20, 21, 29,30
नवम्बर1, 2, 5, 6, 22, 23, 24, 28, 298, 9, 16, 17, 25, 26
दिसम्बर2, 3, 4, 20, 21, 25, 26, 27, 30, 315, 6, 13, 14, 15, 23, 24
तुला राशि की शुभ-अशुभ तारीख़ें

तुला राशि का वार्षिक भविष्यफल

Tula Rashifal 2024
तुला राशि

यह साल तुला राशि वालों के लिए शानदार रहेगा। स्वास्थ्य में सुधार होगा। मित्रें का साथ सहयोग मिलेगा। व्यापार में रुकावटें व अवरोधों के साथ उन्नति होगी। हालांकि विद्यार्थियों के लिए यह साल

कोई खास उन्नतिप्रद नहीं है, विद्यार्थियों को मन के अनुरूप परिणाम नहीं मिलेंगे। वहीं पाँचवे शनि के कारण संतान को लेकर कैरियर, विवाह, अध्ययन आदि को लेकर चिंता रहेगी। व्यापार में हालत व स्थितियों को बेहतर बनाने के लिए आप भरसक प्रयास व परिश्रम करेंगे। काफी हद तक परिणाम भी अनुकूल ही रहेंगे। मंगल, धनेश पराक्रम स्थान में स्थित हैं, अतः

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धन प्राप्ति के योग हैं, परंतु पैसा पास में टिक नहीं पायेगा। पैसा आने से पहले जाने का रास्ता भी तैयार रहेगा। व्यापार व कारोबार में विस्तार की योजना पर काम शुरू होगा। उसमें धन का व्यय भी होगा। साथ घर में इस साल कोई दैनिक उपयोग की महत्वपूर्ण वस्तु भी खरीद सकते हैं, छठे भाव में राहु की स्थिति है, वर्ष पर्यंत राहु छठे भाव में चलायमान रहेंगे। अतः गुप्त शत्रुओं से सावधान रहना है। खासकर गुप्त शत्रुओं से विशेष सावधानी आवश्यक है, आपके अपने लोग ही आपके साथ विश्वासघात या धोखा कर सकते हैं, रुपयों पैसों के मामले में किसी पर भी भरोसा नहीं करें।

1 मई के बाद देवगुरु बृहस्पति आठवें स्थान में आ जायेंगे, अतः कहीं न कहीं यह स्थिति तुला राशि के विद्यार्थियों के लिए प्रतिकुल ग्रह स्थितियों की रहेगी। विद्यार्थियों का मन पढ़ाई से भटकेगा। मनोवांछित कॉलेज व स्कूल में दाखिला, विषय का चयन आदि को लेकर मन में असमंजस रहेगा। रुका हुआ

रुपया कहीं से प्राप्त होगा। तुला राशि के जातक संतुलन करने में माहिर होते हैं। लाभ हानि आय व्यय में आप बेहतर संतुलन

कायम करेंगे। वैज्ञानिक दृष्टिकोण व उन्नत सोच आपको आगे बढ़ने में सहयता प्रदान करेगी। लेकिन हां आर्थिक मामलों में निवेश से पूर्व अच्छी तरह से सावधानी से काम लें। सभी लोग आपके प्रभाव व पराक्रम को स्वीकारेंगे। भागीदार व पार्टनर पर अधिक विश्वास हानि का कारण बन सकता है। धर्म अध्यात्म के प्रति मन में श्रद्धा का भाव रहेगा। 1 मई से पूर्व आपकी राशि पर बृहस्पति की दृष्टि के कारण धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण काम होगा। घर के किसी वरिष्ठ व्यक्ति का स्वास्थ्य गड़बड़ हो सकता है। जिस कारण आपको अस्पताल के चक्कर काटने पड़ सकते हैं। 30 जून से 15 नवम्बर के मध्य जीवन साथी के मध्य गलत फहमियां उत्पन्न हो सकती हैं। आर्थिक मामलों में किसी पर भी भरोसा नहीं करें।

किसी की चिकनी चुपड़ी बातों में आकर अपना ही नुकसान कर बैठेंगे। बृहस्पति 1 मई तक सातवें स्थान में है, जीवन साथी का स्वास्थ्य चिंता का विषय रह सकता है, 30 जून से 15 नवम्बर के मध्य शनि के वक्र काल में नए निवेश से बचें। इस साल घर में किसी नवीन वस्तु की खरीददारी संभव है, जो योजना या प्लानिंग पिछले काफी समय से चल रही थी। उस पर आंशिक रूप से काम शुरू होगा। किसी जरूरतमंद मित्र या रिश्तेदार की तरफ मदद का हाथ बढ़ायेंगे। शारीरिक सुख एवं स्वास्थ्यः- स्वास्थ्य की दृष्टि से

यह साल अच्छा ही रहेगा। किसी गंभीर व घातक बीमारी की आशंका व संभावना नहीं है, बुरी सोहबत, बुरी आदतों का त्याग कर दें। शराब व अन्य नशे के सेवन से दूर रहें, नहीं तो आप किसी गम्भीर बीमारी को नियंत्रण दे बैठेंगे। आप तुला राशि के जातक हैं, तथा वायु विकार, जोड़ों में तकलीफ, नसों से सम्बन्धित व्याधि, कमर दर्द, जैसी बीमारियों से कष्ट की स्थिति में साफ-साफ देख पा रहा हूँ। 30 जून से 15 नवम्बर के शनि वक्र स्थिति में चलायमान रहेंगे। इस दौरान वाहन सावधानीपूर्वक चलायें, स्वास्थ्य में छोटी-मोटी परेशानियां बड़ा

रूप ले सकती हैं, अतः लापरवाही नहीं करें। अपने खान-पान, दिनचर्या, जीवनचर्या का विशेष ध्यान रखें। घर के बडे-बुजुर्ग व वरिष्ठ व्यक्तियों की सेवा करें उससे गुरु बलवान होगा, तथा स्थाई सम्पति के योग बनायेगा।

व्यापार, व्यवसाय व धनः- कारोबार में तरक्की होगी व्यापार को विस्तार करने के बारे में आप नित नई सोच रखेंगे। लेकिन कारोबार में अपरिचित व्यक्तियों पर विश्वास करके

धन गवा सकते हैं। व्यापार को लेकर बनाई गई योजना पर काम शुरू होगा। नए-नए लोगों के साथ व्यापारिक अनुबंधन व करार होंगे। व्यापारिक, व्यक्तिगत व पारिवारिक जीवन में आप बेहतर तालमेल स्थापित करने में आप सफल होंगे। नई मार्केटिंग स्ट्रेटजी (रणनीति) बनाकर योजनाबद्ध तरीके से काम करेंगे। नई मशीनरी तकनीक, हुनर, ज्ञान का आप अपने काम में उपयोग करेंगे। इस साल किसी अनुभवी व वरिष्ठ व्यक्ति से आपको लाभ प्राप्ति के कुछ टिप्स मिलेंगे। छठे भाव में वर्ष पर्यंत राहु की स्थिति यह दर्शा रही है कि व्यावसायिक प्रतिद्धन्दीयों व प्रतिस्पर्धियों से सावधान रहें। 1 मई के बाद देवगुरू आठवें स्थान में आयेंगे, अतः कारोबार पर पकड़ थोड़ी ढ़ीली पडे़गी। व्यापार के काम लम्बित होंगे। पकड़ बनते बनते रुक जायेगी। भूमि भवन, वाहन प्लॉट आदि के रख रखाव पर खर्चा होगा। सम्पति संबन्धी विवाद शुरुआत में तो उलझेंगे परंतु धीरे-धीरे सुलझ व सलट जायेंगे। 30 जून से 15 नवम्बर के मध्य आर्डर हाथ में आता-आता रुक जायेगा। शनि वक्र स्थिति में चलायमान रहेंगे, अतः व्यापारिक निर्णय कोई गलत भी हो सकता है। आपका आर्डर कहीं अटक सकता है। किसी न किसी कारण से स्थिति कश्मकस व तना से परिपूर्ण बनी हुई है।

घर परिवार, संतान व रिश्तेदारः- परिवार में बहुत ही खुशनुमा वातावरण रहेगा देवगुरु बृहस्पति वर्षारंभ में सातवें स्थान में स्थित है। अतः पति-पत्नी में आपसी सामंजस्य का भाव विद्यमान रहेगा। गलत फहमियों व मतभेदों का निपटारा होगा। आप यह महसूस करोगे कि हर स्थिति परिस्थिति में जीवन साथी कन्धे से कन्धा मिलाकर आपके साथ खड़ा है। संतान के कैरियर अध्ययन विवाह आदि को लेकर मन में चिंता रहेगी। भाइयों व रिश्तेदारों के कोई कान आपके खिलाफ भर सकते हैं। अपनी बुद्धि व विवेक का प्रयोग

करके ही प्रतिक्रिया दें। संतान की गतिविधि कार्यकलाप आपको चिंता में डाल सकता है। संतान की सोहबत का विशेष ध्यान रखें। इस साल 1 मई के पश्चात् गुरु के आठवें स्थान परिभ्रमण के कारण घर किसी वरिष्ठ सहाय का स्वास्थ्य गडबड़ होगा। उनको लेकर अस्पताल आदि का खर्चा भी हो सकता है। पिता पुत्र में देवराणी, जेठाणी, सास बहु में हल्की-फुल्की नोंक-झोंक हो सकती है। सम्पति संबन्धी विवाद किसी वरिष्ठ व्यक्ति, बुजुर्ग की मध्यस्थता से हल हो सकता है।

विद्याध्यन, पढ़ाई व कैरियरः- इस वर्ष 1 मई तक देवगुरु बृहस्पति सप्तम स्थान में चलायमान है। लग्न पर पूर्ण दृष्टि है, अतः यह समय विद्यार्थियों के लिए उत्तम फलों को देने वाला रहेगा। विदेश यात्र के इच्छुक विद्यार्थियों के कागजाद संबंधी परेशानी दूर होगी। पंचम स्थान में शनि की स्थिति है, अतः प्रेम आकर्षित करेगा। परंतु प्रेम प्रसंगों में पड़कर अपने अध्ययन व कैरियर के साथ कोई समझौता नहीं करें। नौकरी में तयशुदा लक्ष्यों को हासिल कर लेंगे। बाँस व अधिकारी आपके काम से खुश रहेंगे। 30 जून से 15 के मध्य सहकर्मी आपके विरुद्ध कोई गुप्त योजना या षडयंत्र कारित कर सकते हैं। अगर आप राजकीय सेवा में हैं, तो आर्थिक मामलों में ज्यादा सावधानी आवश्यक है। इंटरव्यू, ग्रुप डिस्कशन आदि में सफलता मिलेगी। कैरियर से सम्बन्धित प्रतियोगी परीक्षा, विभागीय परीक्षा, प्रमोशन से सम्बन्धित परीक्षा में सफलता मिलेगी।

प्रेम-प्रसंग व मित्रः- इस वर्ष वर्ष पर्यंत पंचमेश पंचम स्थान में चलायमान हैं, गतिशील है। अतः पंचमेश का परिभ्रमण प्रेम-प्रसंगों के लिहाज से अच्छा है। प्रेमी-प्रेमिका से मेल-मुलाकात होगी। प्रेम का भरपूर लुत्फ उठायेंगे। शुक्र वर्षारंभ में द्वितीय भाव से कमजोर होते हैं। 30 जून से 15 नवम्बर के मध्य शनि वक्र स्थिति में चलायमान रहेंगे। अतः प्रेम सम्बन्ध कहीं न कहीं बदनामी का कारण बन सकते हैं। पारिवारिक सुख-शांतिबाधित होगी। मित्रें की संख्या में इजाफा तो होगा। परंतु सच्चे व अच्छे मित्र नहीं मिल पायेंगे।

वाहन, खर्च व शुभकार्यः- इस वर्ष मंगल वर्षारंभ में तीसरे स्थान में गतिशील है, अतः नवीन वाहन के योग बन सकते हैं। पुराने वाहन की रिपेयरींग, रख-रखाव पर बार-बार खर्च होगा, भूमि, भवन, फ्लैट आदि की खरीद के योग इस वर्ष बने हुए हैं। आय का पाया मजबूत रहेगा, लेकिन खर्चा का पाया भी रहेगा। आमदनी से बढ़कर खर्च होगा। किसी शुभ व मांगलिक कार्य पर खर्च की

रूपरेखा व प्लानिंग बन सकती है। 1 मई से पूर्व घर में कोई महत्वपूर्ण वस्तु की खरीद कर सकते हैं। भूमि, भवन, वाहनादि पर खर्च का योग बना हुआ है। लेकिन साथ ही वर्ष पर्यंत बारहवां केतु कुछ फिजूल के कामों में भी खर्च करवायेगा, फिजूलखर्ची पर नियंत्रण करें।

हानि, कर्ज व अनहोनीः- इस वर्ष धनहानि की तो संभावना न के बराबर है। परंतु आर्थिक मामले में किसी पर भी भरोसा करना आपकी भूल हो सकती है। अपरिचित व्यक्यिों से आर्थिक व्यापार सोच-समझकर करें, जहाँ तक कर्ज की बात है। व्यापार के लिए, ऋण लेना पड़ सकता है, लेकिन धीरे-धीरे ऋण चुकता भी हो जायेगा। 30 जून से 15 नवम्बर के मध्य शक्ति के वक्र राशि में परिवर्तन के फलस्वरूप किसी मित्र या घनिष्ठ व्यक्ति के साथ कोई अनहोनी व अप्रिय घटना घटित हो सकती है। घर के बड़े-बुजुर्गों के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।

यात्रएंः- इस वर्ष वर्ष पर्यंत केतु की स्थिति बारहवें स्थान में है, अतः स्थान की यात्र का योग है। परिवार के साथ तीर्थ स्थल व धर्म स्थल की यात्र का प्रोग्राम बना सकते है। व्यापारिक यात्रएं कोई खास सार्थक नहीं रहेंगी।

रोजी-रोजगार व काम-काज की बढ़ोतरी

रोजी-रोजगार व काम-काज की बढ़ोतरी के लिए आप कुछ ठोस व महत्त्वपूर्ण निर्णय लेंगे, जिसका लाभ व प्रतिफल दीर्घकालिक रहेंगे। इस वर्ष एक बार मन में जो ठान लेंगे, उसे पूरा करके ही दम लेंगे। मनोनुकूल तबादला, पदोन्नति व वेतन वृद्धि के अवसर मिल सकते हैं।

तुला राशि की चारित्रिक विशेषताएं

तुला राशि का स्वामी शुक्र है। शुक्र तड़क-भड़क व सौंदर्य का कारक ग्रह है। तुला राशि के व्यक्ति नकारात्मकता व सकारात्मकता में संतुलन करते हैं।
इस राशि का राशि चिन्ह ‘तुला’ (तराजू) है। तराजू दो वस्तुओं के संतुलन का परीक्षण करते हुए हल्की व भारी वस्तु का बोध कराती है। अतः इस राशि वाले व्यक्ति की संतुलन शक्ति बड़ी गजब की होती है। अपनी फुर्तीली निर्णयात्मक शक्ति के कारण तुला राशि के लोग शीघ्र ही लोगों पर छा जाते हैं। ‘तराजू’ व्यापार का परिचायक है, इस राशि के लोग बड़े कुशल व्यापारी होते हैं तथा लोक व्यवहार में चतुर होने के कारण इनको व्यापारिक सफलता शीघ्र मिल जाती है।
तुला राशि, पुरुष जाति सूचक व क्रूर स्वभाव राशि मानी जाती है। सच्चा व खरा परीक्षण करने की क्षमता आप रखते हैं और सहज ही किसी व्यक्ति के छलावे में नहीं आते। आप राजनीति के क्षेत्र में भी सफलता प्राप्त कर सकते हैं। जन्म कुंडली में यदि शुक्र की स्थिति अच्छी है, तो आप कुशल अभिनेता भी बन सकते हैं।
सामान्यतया तुला राशि में उत्पन्न जातक सुन्दर, स्वस्थ एवं सुदर्शन व्यक्तित्व के स्वामी होते हैं। उनकी प्रवृत्ति हास्य प्रिय होती है तथा बच्चों के प्रति इनके मन में प्रबल स्नेह का भाव विद्यमान रहता है। सुन्दर दृश्यों एवं वस्तुओं के प्रति भी इनमें आकर्षण रहता है। स्वाभाविक रूप से ये अन्य जनों को किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं देते हैं तथा सबके साथ समानता का व्यवहार करते हैं, जिससे समाज में ये सम्मानित, प्रतिष्ठित तथा प्रसिद्ध होते हैं। कला के प्रति इनका भावनात्मक लगाव रहता है तथा अच्छे कार्यों से ये अपनी आजीविका अर्जित करते हैं। नीति ज्ञान में ये चतुर होते हैं। अतः राजनीति के क्षेत्र में इनको नेतृत्व प्राप्त हो जाता है, परन्तु इनका कोई निश्चित सिद्धांत नहीं होता है।
तुला के प्रभाव से आपका व्यक्तित्व आकर्षक होगा, जो लोगों को प्रभावित करने में समर्थ होगा। आपकी प्रवृत्ति हास्यप्रिय होगी। बच्चों के प्रति आपके मन में स्नेह का भाव रहेगा तथा प्राकृतिक दृश्यों के प्रति आपके मन में आकर्षण रहेगा। साथ ही कला से आपका भावनात्मक संबंध रहेगा।
आप सभी लोगों से समानता का व्यवहार करेंगे तथा आपके मन में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं रहेगा। अपने कार्यक्षेत्र में आपका प्रभाव रहेगा तथा आपके अधिकारी एवं सहयोगी आपसे प्रसन्न तथा संतुष्ट रहेंगे। आप किसी नवीन सिद्धांत या ग्रंथ की भी रचना कर सकते हैं, जिससे आपको यश की प्राप्ति होगी।
आप अत्यंत बुद्धिमान होंगे तथा अपनी बुद्धिमत्ता से अपने सांसारिक कार्यों को सम्पन्न करेंगे। इनमें आपको इच्छित सफलताएं भी मिलती रहेंगी। आपकी प्रवृत्ति विलासी होगी तथा भौतिकता के प्रति अत्यधिक आकर्षण रहेगा। भ्रमणप्रिय होने के कारण समय-समय पर यात्रा भी करते रहेंगे। कला एवं संगीत में आप निपुण होंगे तथा कार्य करने में अत्यंत ही दक्ष होंगे।
शुक्र ऐश्वर्यशाली व विलासपूर्ण ग्रह है। गौर वर्ण, मध्यम कद तथा सुन्दर आकर्षक चेहरा इस राशि वाले जातक के प्रारम्भिक लक्षण हैं। यह राशि चर संज्ञक, वायु तत्व प्रधान व पश्चिम दिशा की स्वामिनी है। प्राकृतिक स्वभाव वृषभ तुल्य होते हुए भी इस राशि वाले विचारशील, ज्ञान प्रिय, कुशल कार्य, सम्पादक व राजनीतिज्ञ होते हैं।
आपमें सहनशीलता का भाव विद्यमान होगा और धैर्यपूर्वक कार्यों को सम्पन्न करके उनमें सफलता की प्रतीक्षा करने में समर्थ होंगे। साथ ही सरकार या उच्चाधिकारी वर्ग से आपको समय-समय पर धनार्जन होता रहेगा। आपमें शारीरिक बल की भी प्रचुरता रहेगी। फलतः परिश्रम एवं पराक्रम का प्रदर्शन करके आप जीवन में मनोवांछित सफलताओं को अर्जित करेंगे। जिससे समाज में आपका प्रभाव रहेगा तथा सभी लोग आपका आदर करेंगे। साथ ही यश भी दूर-दूर तक व्याप्त रहेगा। धर्म के प्रति आपके मन में पूर्ण श्रद्धा रहेगी तथा अवसरानुकूल आप धार्मिक कृत्यों को नियमपूर्वक सम्पन्न करेंगे, जिससे आपको वांछित लाभ एवं सहयोग मिलता रहेगा। विवाहोपरांत इनके जीवन में कुछ महत्त्वपूर्ण परिवर्तन देखे जा सकते हैं। समुद्री-यात्रा आपके लिए कोई विशेष लाभप्रद नहीं है।
यदि आपका जन्म तुला राशि में ‘चित्रा नक्षत्र’ 3 व 4 चरण (रा, री) में है, तो आपका जन्म 7 वर्ष की मंगल की महादशा में हुआ है। आपकी योनि-व्याघ्र, गण-राक्षस, वर्ण-शूद्र, हंसक-वायु, नाड़ी-अन्त्य, पाया-चांदी, प्रथम तीन चरण का वर्ग-हिरण तथा अंतिम चरण का वर्ग-सर्प है। स्वाति नक्षत्र में जन्मे लोग अति उत्साही, बहुमुखी प्रतिभा के धनी होते हैं।
यदि आपका जन्म तुला राशि में ‘विशाखा नक्षत्र’ के तीन चरणों (ती, तू, ते) में हैं, तो आपका जन्म 16 वर्ष की बृहस्पति की महादशा में हुआ है। आपकी योनि-व्याघ्र, गण-राक्षस, वर्ण-शूद्र, हंसक-वायु, नाड़ी-अन्त्य, पाया-तांबा एवं वर्ग-सर्प है। विशाखा नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति विरोधियों का सफाया बहुत चतुराई से करते हैं।
शुक्र एक विलासी, शीतल व सौम्य ग्रह है। यह रात्रि को हल्की श्वेत झलकदार किरणें बिखेरता है। अतः श्वेत रंग व साफ-सुथरी, ऐश्वर्य प्रधान वस्तुओं का व्यापार आपके अनुकूल कहा जा सकता है। आपके लिए अनुकूल रत्न ‘हीरा’ है।

तुला राशि वालों के लिए उपाय

4 1/4 रत्ती का ओपेल रत्न ‘शुक्र यंत्र’ में जड़वाकर धारण करें। सुगंधित द्रव्यों का प्रयोग करें। घर की महिलाओं, यथा-पत्नी, बहन, बच्ची व माता का सम्मान करें। रविवार व मंगलवार के अलावा पीपल को सींचे। गाय की सेवा करें। सुगन्धित रुमाल पास में रखें।

तुला राशि की प्रमुख विशेषताएं

  1. राशि ‒ तुला
    1. राशि चिह्न ‒ तराजू
    2. राशि स्वामी ‒ शुक्र
    3. राशि तत्त्व ‒ वायु तत्त्व
    4. राशि स्वरूप ‒ चर
    5. राशि दिशा ‒ पश्चिम
    6. राशि लिंग व गुण ‒ पुरुष, रजोगुणी
    7. राशि जाति ‒ शुक्र
    8. राशि प्रकृति व स्वभाव ‒ क्रूर स्वभाव, त्रिधातु प्रकृति
    9. राशि का अंग ‒ गुप्तांग
    10. अनुकूल रत्न ‒ हीरा
    11. अनुकूल उपरत्न ‒ अमेरिकन डायमंड, ओपल
    12. अनुकूल धातु ‒ प्लेटिनम, चांदी
    13. अनुकूल रंग ‒ सफेद
    14. शुभ दिवस ‒ शुक्रवार
    15. अनुकूल देवता ‒ मां लक्ष्मी/संतोषी माता
    16. व्रत, उपवास ‒ शुक्रवार
    17. अनुकूल अंक ‒ 6
    18. अनुकूल तारीखें ‒ 6/15/24
    19. मित्र राशियां ‒ मिथुन, मकर, कुंभ, धनु, कर्क
    20. शत्रु राशियां ‒ सिंह
    21. व्यक्तित्व ‒ अन्वेषक, खोजी, मास्टर माइंड
    22. सकारात्मक तथ्य ‒ आत्मविश्वासी, आकर्षक वाणी
    23. नकारात्मक तथ्य ‒ ईर्ष्या, घमंड, अति धूर्तता
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