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चातुर्मास में क्या करें और क्या न करें,जानिए चातुर्मास 2024 की पूरी जानकारी: Chaturmas 2024 Upay

06:30 AM Jun 30, 2024 IST | Ayushi Jain
चातुर्मास में क्या करें और क्या न करें जानिए चातुर्मास 2024 की पूरी जानकारी  chaturmas 2024 upay
Chaturmas 2024 Upay
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Chaturmas 2024: हिंदू धर्म में आध्यात्मिकता और आत्मविश्लेषण का पावन पर्व है चातुर्मास। देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं, और तब से लेकर देवउठनी एकादशी तक का यह काल भगवान शिव की आराधना और आत्मिक शुद्धि का उत्तम अवसर माना जाता है। यह चार महीनों का अवधि आध्यात्मिक चमक को पुनः प्राप्त करने का स्वर्णिम काल है।

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जब सृष्टि का संचालन स्वयं भगवान शिव करते हैं, तब धरती पर एक दिव्य और पवित्र वातावरण का अनुभव होता है। चातुर्मास के दौरान मांगलिक कार्यक्रमों पर रोक लगाई जाती है, जिससे लोग भौतिक सुखों से विरक्त होकर आध्यात्मिक मार्ग पर ध्यान केंद्रित कर सकें। यह पवित्र काल हमें व्रत, पूजा, दान, स्वाध्याय और ध्यान जैसे पुण्य कार्यों को करने का अवसर प्रदान करता है। आइए, इस चातुर्मास का सदुपयोग कर अपने आत्मा को पवित्र करें और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं।

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कब से हो रही चातुर्मास की शुरुआत

हिंदू धर्म में आध्यात्मिकता और आत्मविश्लेषण का पावन पर्व चातुर्मास 17 जुलाई 2024 से प्रारंभ हो रहा है और 12 नवंबर 2024 तक रहेगा। यह चार महीने का पवित्र काल देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक का होता है।

चातुर्मास में इन देवी-देवताओं की होती है विशेष पूजा

देव शयन के पश्चात चार महीनों की अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। इस दौरान भगवान विष्णु योग निद्रा में लीन रहते हैं और सृष्टि का भार भगवान शिव संभालते हैं। इस पवित्र काल में भक्त भगवान शिव और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा करते हैं। इनकी आराधना से मानसिक शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। चातुर्मास में किए गए धार्मिक अनुष्ठान और व्रत अत्यंत फलदायी होते हैं। इनसे जीवन में संतुलन और सकारात्मकता आती है। देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के जागरण के साथ ही चातुर्मास का समापन होता है। इसके बाद मांगलिक कार्य आरंभ होते हैं और धार्मिक उत्सवों का दौर शुरू होता है। इस पावन अवसर पर आइए हम भी भगवान शिव और माता लक्ष्मी की भक्ति में लीन होकर उनसे सुख-समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना करें।

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चातुर्मास में दान की जाने वाली वस्तुएं

गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, दाल, चावल, वस्त्र, कंबल आदि का दान करें। बरसात के मौसम को ध्यान में रखते हुए छाता और चप्पल का दान सार्थक माना जाता है। मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए कपूर और तेल का दान कर सकते हैं। गरीब और असहाय लोगों को दवाइयाँ दान कर उनके स्वास्थ्य की रक्षा में योगदान दें। धार्मिक ग्रंथों या ज्ञानवर्धक पुस्तकों का दान धर्म-कर्म के प्रसार और शिक्षा को बढ़ावा देता है। पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधे लगाएं और उनका दान करें।

दान का महत्व

चातुर्मास में किया गया दान कई गुना पुण्य फल दिलाता है। दान करने से न केवल दान करने वाले को अपितु दान प्राप्त करने वाले व्यक्ति के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आते हैं। ऐसा माना जाता है कि दान करने से भगवान प्रसन्न होते हैं और दान करने वाले को जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। दान गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करने का एक प्रभावी माध्यम है। दान करने से समाज में समरता का भाव बना रहता है। दान करने से मन को असीम शांति और आत्म-संतुष्टि मिलती है। यह परोपकार की भावना को जगाता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक होता है।

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